बैतूल में फिर हिली धरती :3.9 तीव्रता का आया भूकंप... घरों से बाहर भागे लोग, 3 महीने में तीसरी बार कांपी धरती

बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में शनिवार रात अचानक धरती कांपने से लोगों में दहशत फैल गई। रात करीब 9 बजकर 31 मिनट पर आए भूकंप के झटकों के डर से लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। इसके झटके मुलताई, पांढुर्णा और आसपास के क्षेत्रों में महसूस हुए। हालांकि राहत की बात यह रही कि, इसकी वजह से किसी तरह के जान-माल का नुकसान नहीं हुआ।
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.9 मापी गई। भूकंप का केंद्र बैतूल जिले के मुलताई क्षेत्र के मानीखापा गांव के पास जमीन से करीब 10 किलोमीटर नीचे था। कम गहराई होने की वजह से झटके लोगों ने ज्यादा तेज महसूस किए।
मुलताई में हिले दरवाजे-खिड़कियां
भूकंप के झटकों के दौरान कई इलाकों में घरों के दरवाजे, खिड़कियां और लोहे के गेट हिलने लगे। मुलताई निवासी पाशा खान ने बताया कि, रात अचानक कंपन महसूस हुई और कुछ सेकेंड तक घर कांपता महसूस हुआ। इसके बाद इलाके में अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई और लोग तुरंत बाहर निकल आए। कई परिवार देर रात तक घरों के बाहर खड़े रहे। लोगों ने एक-दूसरे को फोन कर जानकारी ली और सोशल मीडिया पर भी भूकंप की खबर तेजी से फैल गई।
क्षेत्र में दो महीने में तीसरी बार आया भूकंप
स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले दो महीनों में यह तीसरी बार है जब इलाके में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। इससे पहले भी मार्च और अप्रैल में हल्के कंपन दर्ज किए गए थे। लगातार हो रही भूकंपीय गतिविधियों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मध्य प्रदेश-महाराष्ट्र सीमा क्षेत्र में हल्की भूकंपीय गतिविधियां सामान्य मानी जाती हैं, लेकिन बार-बार झटके महसूस होने पर निगरानी बढ़ाना जरूरी हो जाता है।
अलर्ट पर प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीम
भूकंप के बाद जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग तुरंत अलर्ट मोड पर आ गया। बैतूल कलेक्टर सौरभ संजय सोनवणे ने भूकंप की पुष्टि करते हुए कहा कि, फिलहाल किसी नुकसान की सूचना नहीं है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और सतर्क रहने की अपील की है। साथ ही जर्जर इमारतों से दूर रहने और किसी भी आपात स्थिति में प्रशासनिक हेल्पलाइन से संपर्क करने को कहा गया है।
पांढुर्णा और छिंदवाड़ा सीमा तक असर
भूकंप का असर केवल बैतूल तक सीमित नहीं रहा। पांढुर्णा, छिंदवाड़ा सीमा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी लोगों ने कंपन महसूस किया। कुछ लोगों ने बताया कि बिस्तर और अलमारी तक हिलती महसूस हुई। हालांकि कंपन कुछ ही सेकेंड तक रहा, लेकिन रात के समय आए झटकों ने लोगों को डरा दिया। कई गांवों में लोग देर रात तक जागते रहे।
क्यों ज्यादा महसूस हुए झटके?
जानकारी के मुताबिक, भूकंप की तीव्रता 3.9 थी, जो सामान्य तौर पर हल्के भूकंप की श्रेणी में आती है। लेकिन इसका केंद्र जमीन से केवल 10 किलोमीटर नीचे था, इसलिए कंपन अधिक महसूस हुआ। कम गहराई वाले भूकंप का असर सतह पर ज्यादा होता है, जबकि ज्यादा गहराई वाले भूकंप के झटके अपेक्षाकृत कम महसूस होते हैं।
रिक्टर स्केल पर कितनी तीव्रता कितना असर डालती है?
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रिक्टर स्केल |
असर |
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0-1.9 |
केवल सीज्मोग्राफ में दर्ज |
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2-2.9 |
हल्के झटके महसूस |
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3-3.9 |
ट्रक गुजरने जैसा कंपन |
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4-4.9 |
खिड़कियां टूट सकती हैं |
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5-5.9 |
दीवारों में दरारें संभव |
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6-6.9 |
कच्चे मकान गिर सकते हैं |
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7-7.9 |
भारी तबाही, इमारतें गिर सकती हैं |
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8 से ज्यादा |
बड़े पुल और इमारतें तबाह, सुनामी का खतरा |











