ममता बनर्जी ने कार्यकर्ताओं की संभावित गिरफ्तारी, प्रशासनिक दबाव और चुनावी गड़बड़ी की आशंका जताते हुए उन्हें अगले कुछ दिनों तक बेहद सतर्क रहने की सलाह दी है। इसके साथ ही उन्होंने बीजेपी और चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
ममता बनर्जी ने साफ कहा है कि चुनाव से पहले कई टीएमसी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि यह कार्रवाई एक तय रणनीति के तहत हो सकती है। कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अगले 15-20 दिन बेहद अहम हैं। उन्होंने चेताया कि किसी भी परिस्थिति में लापरवाही न बरती जाए। ममता के मुताबिक, यह चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि यह कार्रवाई रविवार रात से शुरू हो सकती है। ऐसे में पार्टी कैडर को हर हाल में सतर्क और संगठित रहने की जरूरत है।
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ममता बनर्जी ने सीधे तौर पर बीजेपी नेतृत्व पर आरोप लगाए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का नाम लेते हुए सियासी हमले किए। साथ ही चुनाव आयोग और राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए किया जा सकता है। ममता ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों के तबादले इसी रणनीति का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि इससे निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। हालांकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
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विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर ममता बनर्जी लगातार चिंता जता रही हैं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट में पैरवी के कारण कई नाम कटने से बच गए। ममता ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताया है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे अपने वोट के अधिकार को लेकर सतर्क रहें। ममता के मुताबिक, यह प्रक्रिया चुनावी समीकरण बदलने का प्रयास हो सकती है। इस मुद्दे को लेकर राज्य में राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
ममता बनर्जी ने आम जनता को भी बीजेपी के खिलाफ चेताया है। उन्होंने कहा कि अगर बीजेपी सत्ता में आती है तो लोगों को परेशान किया जाएगा। ममता ने दावा किया कि लोगों को बांग्ला बोलने और खानपान की आजादी पर असर पड़ सकता है। उन्होंने NRC और डिटेंशन सेंटर जैसे मुद्दों को भी उठाया। ममता के मुताबिक, परिसीमन की प्रक्रिया भी बंगाल को कमजोर करने की कोशिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी डर और दबाव की राजनीति कर रही है। साथ ही उन्होंने भरोसा जताया कि जनता इस बार भी टीएमसी का समर्थन करेगी।