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पुराने सामान से हो रहा ब्यूटीफिकेशन, खिलौने से लेकर बैग्स तक बना रहे

पुराने सामान से हो रहा ब्यूटीफिकेशन, खिलौने से लेकर बैग्स तक बना रहे
प्रीति जैन/ अपसाइक्लिंग का ट्रेंड और इसे लेकर लोगों की समझ धीरे-धीरे बढ़ रही है। खासतौर पर होम गार्डन तैयार करने से लेकर ब्यूटीफिकेशन के काम में अपसाइक्लिंग के नए-नए आइडिया देखने को मिले हैं। अपसाइकिल का मतलब है कि प्लास्टिक की बोतल, प्लास्टिक के पुराने आइटम, लकड़ी की छाल, बचे हुए धागे, फैब्रिक वेस्ट, लकड़ी के बेकार टुकड़े जैसी वस्तुओं से क्रिएटिव सामान बनाना। भोपाल में स्वच्छता व अपसाइक्लिंग पर काम करने समूह इस दिशा में काम कर रहे हैं। वहीं भोपाल के बने फैब्रिक स्क्रैप से विदेशों में हैंडबैग, टॉयज और ज्वेलरी भेजी जा रहीं हैं। इसके अलावा रक्षाबंधन के लिए इसी तरह के स्क्रैप से राखियां बनार्इं जाएंगी। बुटिक से निकले फैब्रिक वेस्ट का यूज अपसाइक्लिंग के जरिए पुराने सामान को नया रूप दे सकते हैं। भोपाल में बुटिक से निकलने वाले फैब्रिक वेस्ट से तरह-तरह की आकृतियों वाले खिलौने बनाए जा रहे है जो कि नीदरलैंड्स और आॅस्ट्रेलिया तक जाते हैं। भोपाल में यह काम महाशक्ति सेवा केंद्र कर रहा है। कई लोग पुराने टायर्स से सिटिंग अरेजमेंट भी कर रहे हैं।   जींस का बना गमला   10 नंबर मार्केट के फूड जोन एरिया में हाल में स्वच्छता किटी ग्रुप ने तरह-तरह के ब्यूटीफिकेशन के काम किए हैं, जिसमें से एक खास डिजाइन है, जिसमें पुरानी जींस और जूतों से डमी खड़ी करते हुए इसके ऊपरी हिस्से में प्लांट लगाए गए हैं। फैक्ट्री स्क्रैप का भी इस्तेमाल हम भोपाल की फैक्ट्री से निकलने वाले वेस्ट तो अपनी जरूरत के हिसाब लेते हैं, जैसे पोर्सिलेन इंसुलेटर, लकड़ी के खोखे, नारियल, यूज्ड बॉटल, कप, प्लास्टिक के सामान आदि। इन्हें कई जगहों की सफाई कर वहां एक डिजाइन के रूप में पेश करते हैं। हमने हाल में 10 नंबर फूड जोन एरिया में कई पेड़ों के चबूतरों के आसपास यह काम किया है। 65 लोगों की टीम यह काम करती है। - रुचिका सचदेवा, स्वच्छता किटी देश-विदेश से आ रही मांग हम 200 से 250 किलो फैब्रिक वेस्ट से हैंडबैग, दरियां, मैट व खिलौने बनाते हैं जो कि बुटिक से बचने वाला मटेरियल होता है। भोपाल के ताज लेक फ्रंट होटल में इस तरह का सामान समय-समय पर लिया जाता है। अपसाइक्लिंग करके कपड़े के स्क्रैप को लैंडफील्ड में जाने से रोक पाते हैं और अब बड़ी सिटीज और विदेशों से इनकी मांग आ रही है। - पूजा आयंगर, एमएसके
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