नर्मदापुरम। नर्मदापुरम जिले के ग्राम गनोरा में रविवार शाम उस समय हड़कंप मच गया, जब एक खेत में दो विशालकाय अजगर दिखाई दिए। अचानक सामने आए इन बड़े सांपों को देखकर ग्रामीणों में डर और कौतूहल दोनों का माहौल बन गया। हालांकि वन विभाग और सर्पमित्रों की तत्परता के चलते स्थिति जल्दी ही नियंत्रण में आ गई। टीम ने दोनों अजगरों का सुरक्षित रेस्क्यू कर उन्हें आबादी से दूर जंगल में छोड़ दिया, जिससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
जानकारी के अनुसार रविवार शाम करीब 7 बजे ग्राम गनोरा निवासी अनिल बरखने अपने खेत में टहल रहे थे। इसी दौरान गेहूं की खड़ी फसल में अजीब सी हलचल दिखाई दी। जब उन्होंने पास जाकर देखा तो वहां दो बड़े सांप नजर आए। देखते ही देखते खबर पूरे गांव में फैल गई और मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। स्थिति को देखते हुए तुरंत वन विभाग और सर्पमित्रों को सूचना दी गई।
वन परिक्षेत्र अधिकारी अभिषेक शर्मा के निर्देशन में सर्पमित्र अभिजीत यादव के मार्गदर्शन में रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। सर्पमित्र अमन सगोरिया, सौरभ बकोरिया और विशाल उइके ने सावधानी और अनुभव का परिचय देते हुए खेत में छिपे दोनों अजगरों को कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित पकड़ लिया। रेस्क्यू किए गए सांप इंडियन रॉक पायथन प्रजाति के थे, जो जहरीले नहीं होते। इनमें से एक अजगर की लंबाई करीब 12 फीट और दूसरे की लगभग 8 फीट बताई गई।
रेस्क्यू के बाद टीम ने वन चौकी में पूरी जानकारी दर्ज कराई और दोनों अजगरों को प्राकृतिक आवास वाले सुरक्षित जंगल क्षेत्र में छोड़ दिया। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि यदि कहीं वन्य जीव दिखाई दें तो उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश न करें और तुरंत वन विभाग या प्रशिक्षित सर्पमित्रों को सूचना दें।
अजगर दुनिया के सबसे बड़े सांपों में गिने जाते हैं और भारत में पाए जाने वाले इंडियन रॉक पायथन संरक्षित प्रजाति हैं। ये सांप जहरीले नहीं होते, बल्कि अपने मजबूत शरीर से शिकार को जकड़कर पकड़ते हैं। सामान्यतः ये चूहे, खरगोश, पक्षी और छोटे जानवरों को खाते हैं, इसलिए खेतों में इनकी मौजूदगी कई बार किसानों के लिए फायदेमंद भी मानी जाती है क्योंकि ये फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कृन्तकों की संख्या नियंत्रित करते हैं। अजगर आमतौर पर इंसानों से दूर रहना पसंद करते हैं और तभी सामने आते हैं जब उनका प्राकृतिक आवास प्रभावित हो जाता है। इसलिए वन्यजीवों के संरक्षण और मानव-वन्यजीव संतुलन बनाए रखने के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है।