बस्तर में मां दंतेश्वरी को कच्चे सूत की राखी चढ़ाई, 800 साल पुरानी परंपरा निभाई

छत्तीसगढ़ के बस्तर में रक्षाबंधन से एक दिन पहले मां दंतेश्वरी को कच्चे सूत से बनी राखी चढ़ाने की परंपरा निभाई जाती है। इस साल भी शुक्रवार की शाम मंदिर में यह अनोखी रस्म पूरी की गई। इसे यहां ‘राखी तिहार’ कहा जाता है और यह परंपरा करीब 800 साल पुरानी है।
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बस्तर में मां दंतेश्वरी को कच्चे सूत की राखी चढ़ाई, 800 साल पुरानी परंपरा निभाई
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    छत्तीसगढ़ के बस्तर में रक्षाबंधन से एक दिन पहले मां दंतेश्वरी को कच्चे सूत से बनी राखी चढ़ाने की परंपरा निभाई जाती है। इस साल भी शुक्रवार (8 अगस्त) की शाम मंदिर में यह अनोखी रस्म पूरी की गई। इसे यहां ‘राखी तिहार’ कहा जाता है और यह परंपरा करीब 800 साल पुरानी है।

    सेवादार बनाते हैं विशेष राखी

    मंदिर के सेवादार, जो दंतेवाड़ा के कतियाररास के मादरी परिवार से आते हैं, पीढ़ियों से माता के लिए राखी बनाते आ रहे हैं। इस बार भी उन्होंने मंदिर परिसर में ही कच्चे सूत से राखी तैयार की। राखी को पहले दंतेश्वरी सरोवर में ले जाकर जल से धोया गया।

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    विधि-विधान से पूजा और अर्पण

    राखी धोने के बाद उसे बांस की टोकनी में रखा गया और लाल रंग चढ़ाया गया। फिर विधि-विधान से मां दंतेश्वरी की पूजा कर राखी अर्पित की गई। इसके बाद अन्य देवी-देवताओं को भी राखी चढ़ाई गई।

    आस्था और मान्यता

    मान्यता है कि मां दंतेश्वरी को राखी अर्पित करने और रक्षा बंधन मनाने से जीवन में किसी भी तरह की विघ्न-बाधाएं नहीं आतीं। मंदिर के पुजारियों के अनुसार, रक्षाबंधन से दो दिन पहले से ही यहां तैयारियां शुरू हो जाती हैं और पर्व के दिन पूरे क्षेत्र में उल्लास का माहौल रहता है।

    Shivani Gupta
    By Shivani Gupta

    शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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