बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से एक बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां 11 साल की एक मासूम बच्ची के साथ छेड़छाड़ की कोशिश की गई, लेकिन बच्ची की सूझबूझ और हिम्मत के कारण एक बड़ी घटना टल गई। इस घटना ने जहां लोगों को झकझोर दिया है, वहीं बच्ची के साहस की हर कोई तारीफ कर रहा है।
यह घटना बालोद जिले के पुरूर थाना क्षेत्र की है। जानकारी के मुताबिक, 11 साल की बच्ची अपने घर के पास एक दुकान पर आइसक्रीम खरीदने गई थी। इसी दौरान दुकान चलाने वाले अधेड़ उम्र के व्यक्ति की नीयत खराब हो गई। उसने बच्ची को आइसक्रीम देने का बहाना बनाकर अपने घर के अंदर बुला लिया। जैसे ही बच्ची अंदर गई, आरोपी ने उसके साथ गलत हरकत करने की कोशिश शुरू कर दी। अचानक बदले माहौल को देखकर बच्ची को एहसास हो गया कि कुछ गलत हो रहा है।
स्थिति को समझते हुए बच्ची ने घबराने के बजाय हिम्मत दिखाई। उसने किसी तरह खुद को आरोपी के चंगुल से छुड़ाया और वहां से भाग निकली। सीधे घर पहुंचकर उसने अपने माता-पिता को पूरी घटना बताई। बच्ची की सतर्कता और समझदारी के कारण यह मामला तुरंत सामने आ सका और समय रहते कार्रवाई हो पाई। अगर बच्ची डर जाती या चुप रहती, तो घटना गंभीर रूप ले सकती थी।
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घटना की जानकारी मिलते ही बच्ची के परिजन तुरंत उसे लेकर पुरूर थाने पहुंचे। वहां उन्होंने पूरी घटना की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए बिना देरी के कार्रवाई शुरू की।
शिकायत मिलते ही पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 56 वर्षीय आरोपी रवि शंकर सिन्हा को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि, इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मोनिका ठाकुर ने बताया कि, नाबालिग के साथ छेड़छाड़ का मामला सामने आने के बाद परिजनों की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई की गई। आरोपी को गिरफ्तार कर कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई और उसे जेल भेज दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि, बच्ची की जागरूकता और हिम्मत इस मामले में सबसे अहम रही। उसने डरने के बजाय अपने परिवार को सब कुछ बताया, जिससे समय पर कार्रवाई संभव हो सकी।
पुलिस प्रशासन का कहना है कि, बच्चों की सुरक्षा के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। स्कूलों में गुड टच और बैड टच जैसे विषयों पर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि बच्चे सही और गलत व्यवहार में फर्क समझ सकें। इन अभियानों का उद्देश्य यह है कि, बच्चे किसी भी गलत हरकत को पहचान सकें और तुरंत अपने माता-पिता या शिक्षकों को इसकी जानकारी दें।
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यह घटना इस बात का उदाहरण है कि बच्चों को जागरूक बनाना कितना जरूरी है। अगर बच्ची को सही-गलत का अंदाजा न होता, तो वह इस स्थिति से बाहर नहीं निकल पाती।
बच्चों को ये सब सिखाना जरूरी है-
यह घटना समाज के लिए एक बड़ा संदेश भी है। एक ओर जहां यह मामला चिंता बढ़ाने वाला है, वहीं दूसरी ओर बच्ची की बहादुरी उम्मीद भी देती है। जागरूकता और सही समय पर लिया गया फैसला बड़ी घटनाओं को टाल सकता है। साथ ही यह भी जरूरी है कि, ऐसे मामलों में पुलिस की तेजी से कार्रवाई हो, ताकि अपराधियों को सख्त संदेश मिले।