राम मंदिर चढ़ावा चोरी : 'ये 20 हजार करोड़ का घोटाला'...अखिलेश यादव के चाचा रामगोपाल बोले-इसमें बड़े-बड़े लोग शामिल

इटावा। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में गड़बड़ी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक तरफ उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच कर रही तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का कार्यकाल 15 दिनों के लिए बढ़ा दिया है, वहीं दूसरी ओर समाजवादी पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर सरकार और राम मंदिर ट्रस्ट पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हो रही, जबकि सरकार का कहना है कि पूरे प्रकरण की गहराई से जांच कराई जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
रामगोपाल यादव ने लगाया बड़ा आरोप
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव ने इस मामले को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर के चंदे में कथित हेराफेरी का मामला बेहद बड़ा है और इसकी राशि 20 हजार करोड़ रुपए से भी अधिक हो सकती है। उनके अनुसार, इस प्रकरण में कई प्रभावशाली लोगों की भूमिका होने के कारण जांच वास्तविक जिम्मेदार लोगों तक नहीं पहुंच पा रही है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि सच्चाई सामने आनी चाहिए।
चढ़ावे के हिसाब पर भी उठाए सवाल
रामगोपाल यादव ने यह भी कहा कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं ने राम मंदिर में सोना, चांदी, हीरे के हार और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं बड़ी संख्या में अर्पित की हैं। उनका आरोप है कि इन सभी चढ़ावों का पूरा और पारदर्शी हिसाब अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही उन्होंने 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक के घोटाले का दावा किया है। हालांकि, इस दावे के समर्थन में उन्होंने कोई आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया।
शुरुआती जांच के बाद दर्ज हुई FIR
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, SIT ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। इसके आधार पर 25 जून को इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने आठ आरोपियों को नामजद किया, जिनमें अविनाश शुक्ला, रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, मनीष कुमार यादव, रमाशंकर मिश्रा, करुणेश पांडे और सुभाष श्रीवास्तव और शामिल हैं। सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर उनसे पूछताछ की जा रही है।
जांच का दायरा बढ़ाने की तैयारी
सरकार का कहना है कि जांच केवल दर्ज एफआईआर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे वित्तीय लेन-देन और चढ़ावे के प्रबंधन की भी पड़ताल की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, मामले के सभी पहलुओं की गहराई से जांच सुनिश्चित करने के लिए ही एसआईटी को अतिरिक्त समय दिया गया है। जांच टीम में लखनऊ के आयुक्त आईएएस विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस तथा वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं, जो विभिन्न पहलुओं की अलग-अलग स्तर पर समीक्षा कर रहे हैं।
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जांच के साथ सियासत भी तेज
राम मंदिर चंदा विवाद अब कानूनी जांच के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी बड़ा मुद्दा बन गया है। समाजवादी पार्टी जहां इस मामले को बड़े भ्रष्टाचार से जोड़कर सरकार को घेर रही है, वहीं सरकार जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रही है। फिलहाल एसआईटी की विस्तृत जांच जारी है और आने वाले दिनों में उसकी अंतिम रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या किसी बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितता हुई है।
SIT को मिला 15 दिन का अतिरिक्त समय
उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को सामने आए आरोपों के बाद इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। शुरुआती तौर पर जांच पूरी करने के लिए टीम को 15 दिन का समय दिया गया था। अब जांच के दायरे को बढ़ाने और सभी पहलुओं की गहन पड़ताल करने के उद्देश्य से एसआईटी का कार्यकाल 15 दिनों के लिए और बढ़ा दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी कई महत्वपूर्ण बिंदुओं तक पहुंची है और अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है।












