PlayBreaking News

‘दोस्त इतना असंवेदनशील कैसे हो सकता है?’अमेरिकी कार्रवाई पर थरूर के तीखे सवाल, पूछा- क्या भारतीयों की जान की कोई कीमत नहीं?

ओमान के पास एमटी सेटेबेल्लो जहाज पर अमेरिकी हमले में 3 भारतीय नाविकों की मौत के बाद विवाद बढ़ गया है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर और पवन खेड़ा ने अमेरिका के रवैये पर सवाल उठाए हैं। जानिए पूरा मामला, जयशंकर-रुबियो बातचीत और अमेरिका के जवाब पर भारत की प्रतिक्रिया।
Follow on Google News
अमेरिकी कार्रवाई पर थरूर के तीखे सवाल, पूछा- क्या भारतीयों की जान की कोई कीमत नहीं?
शशि थरूर (फाइल फोटो)

नई दिल्ली। ओमान के समुद्री क्षेत्र और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक व्यापारी जहाज पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद भारत में राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। इस घटना में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई, जबकि 21 अन्य को सुरक्षित बचा लिया गया। हादसे के बाद अमेरिका के आधिकारिक रुख और बयान को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं।

थरूर ने अमेरिकी प्रतिक्रिया को असंवेदनशील बताते हुए पूछा है कि, क्या भारत का रणनीतिक साझेदार होने का दावा करने वाला देश भारतीय नागरिकों की मौत पर संवेदना जताना भी जरूरी नहीं समझता।

शशि थरूर ने अमेरिका से पूछे 3 सवाल

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अमेरिका के आधिकारिक बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि तीन निर्दोष भारतीयों की मौत के बावजूद अमेरिकी बयान में न तो अफसोस दिखाई दिया और न ही संवेदना। थरूर ने सवाल किया कि कोई मित्र और रणनीतिक साझेदार इतना असंवेदनशील कैसे हो सकता है।

थरूर ने अमेरिका के सामने तीन अहम सवाल रखे-

1. क्या जहाज को बिना जान लिए नहीं रोका जा सकता था?
थरूर ने पूछा कि यदि जहाज आदेशों का पालन नहीं कर रहा था, तो क्या उसे रोकने के लिए किसी गैर-घातक तरीके का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता था?

2. क्या मिसाइल दागना ही एकमात्र विकल्प था?
उन्होंने कहा कि जहाज के इंजन, प्रोपल्शन सिस्टम या स्टीयरिंग को निष्क्रिय कर जहाज को रोका जा सकता था। ऐसे में सीधे मिसाइल दागने की जरूरत क्यों पड़ी?

3. क्या भारतीय नाविक अब आसान निशाना बन गए हैं?
थरूर ने कहा कि होर्मुज और आसपास के समुद्री मार्गों से गुजरने वाले अधिकांश व्यापारी जहाजों पर भारतीय नाविक काम करते हैं। ऐसे में क्या अब हर भारतीय नाविक अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के खतरे में रहेगा?

उन्होंने उम्मीद जताई कि विदेश मंत्री जयशंकर ने अमेरिकी पक्ष के सामने भारत की चिंता और नाराजगी मजबूती से रखी होगी।

Twitter Post

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के मुताबिक, पलाउ के झंडे वाले तेल टैंकर एमटी सेटेबेल्लो (MT Setebello) पर कुल 24 भारतीय नाविक सवार थे। यह एक सामान्य व्यापारी जहाज था, जो समुद्री मार्ग से माल परिवहन कर रहा था। अमेरिका ने दावा किया कि, जहाज ने होर्मुज क्षेत्र में लागू नौसैनिक प्रतिबंधों और आदेशों का पालन नहीं किया। 

अमेरिकी पक्ष के अनुसार, जहाज को कई बार निर्देश दिए गए, लेकिन आदेश नहीं माने गए। इसके बाद अमेरिकी नौसेना ने कार्रवाई की। हमले के बाद जहाज में आग लग गई। बचाव अभियान चलाकर 21 भारतीय नाविकों को सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन तीन नाविकों की जान नहीं बच सकी।

भारत ने दर्ज कराया कड़ा विरोध

घटना के बाद भारत सरकार ने तुरंत नाराजगी जताई। नई दिल्ली में अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत को तलब कर विरोध दर्ज कराया गया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि, भारतीय नाविकों वाले व्यापारी जहाजों पर इस तरह की कार्रवाई स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने जोर देकर कहा कि, क्षेत्रीय तनाव का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति से निकल सकता है।

Shashi Tharoor

जयशंकर और मार्को रुबियो के बीच हुई बातचीत

मामले की गंभीरता को देखते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत की। जयशंकर ने कहा कि, सामान्य व्यापारी जहाजों के खिलाफ घातक सैन्य कार्रवाई उचित नहीं मानी जा सकती। इसके बाद रुबियो ने भी जयशंकर से संपर्क किया। बातचीत के दौरान अमेरिकी पक्ष ने दोहराया कि होर्मुज क्षेत्र में लागू उनकी नौसैनिक नाकाबंदी और प्रतिबंधों के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 

अमेरिका ने संकेत दिया कि, वह क्षेत्र में अपने सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू करता रहेगा। यही बयान बाद में विवाद का कारण बना क्योंकि इसमें भारतीय नागरिकों की मौत पर संवेदना या खेद व्यक्त किए जाने का उल्लेख नहीं था।

पवन खेड़ा ने भी साधा निशाना

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और अमेरिका दोनों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि तीन भारतीय नागरिकों की मौत के बाद भारत को अमेरिका से स्पष्ट और बिना शर्त माफी की मांग करनी चाहिए थी। खेड़ा का आरोप है कि, अमेरिका ने न तो जिम्मेदारी स्वीकार की और न ही सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त किया। उन्होंने यह भी कहा कि, विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया और अमेरिका के साथ हुई बातचीत पर्याप्त नहीं लगती।

इससे पहले भी निशाने पर आए भारतीय जहाज

रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल के दिनों में होर्मुज क्षेत्र में भारतीय नाविकों वाले कई जहाज अमेरिकी कार्रवाई का सामना कर चुके हैं। 

  • 8 जून को एक तेल टैंकर पर कार्रवाई की गई थी, जिसमें 24 भारतीय नाविक सवार थे। सभी को सुरक्षित बचा लिया गया था।
  • 10 जून को एमटी सेटेबेल्लो पर हमले में 3 भारतीयों की मौत हो गई।
  • इसके बाद एमटी जलवीर नामक एक अन्य जहाज पर भी कार्रवाई की खबर सामने आई, जिस पर भारतीय नागरिक सवार थे।

इन घटनाओं ने समुद्री सुरक्षा और भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

Strait of Hormuz

भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर खड़े हुए बड़े सवाल

भारत दुनिया के सबसे बड़े समुद्री मानव संसाधन प्रदाताओं में शामिल है। हजारों भारतीय नाविक दुनिया भर के व्यापारी जहाजों पर काम करते हैं। ऐसे में किसी भी अंतरराष्ट्रीय सैन्य कार्रवाई में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बन जाती है।

एमटी सेटेबेल्लो घटना केवल तीन भारतीयों की मौत का मामला नहीं है, बल्कि यह सवाल भी उठाती है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में सैन्य कार्रवाई के दौरान नागरिक जहाजों और उन पर काम कर रहे नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है।

फिलहाल इस घटना को लेकर भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक संवाद जारी है, लेकिन विपक्ष के सवालों ने इस मामले को राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना दिया है।

Manisha Dhanwani
By Manisha Dhanwani

मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

नई दिल्ली
--°
बारिश: -- mmह्यूमिडिटी: --%हवा: --
Source:AccuWeather
icon

Latest Posts