फेमस कॉमेडियन अर्चना पूरन सिंह पिछले एक साल से एक दुर्लभ बीमारी से जूझ रही हैं। 2025 में फिल्म ‘विक्की और विद्या का वो वाला वीडियो’ की शूटिंग के दौरान अर्चना की कलाई में चोट लगी थी। शुरुआत में उन्होंने इसे सामान्य चोट समझकर फिजियोथैरेपी करवाई, लेकिन दर्द कम होने की बजाय बढ़ता गया। फिर जब डॉक्टरों ने जांच की, तो पता चला कि उन्हें CRPS (Complex Regional Pain Syndrome) नाम की बीमारी हो गई है।
CRPS एक ऐसी न्यूरोलॉजिकल कंडीशन है जिसमें शरीर का नर्व सिस्टम असामान्य रूप से एक्टिव हो जाता है। इसके कारण शरीर का अलार्म सिस्टम टूट जाता है। सामान्य चोट में दर्द समय के साथ कम हो जाता है, लेकिन CRPS में चोट के बाद भी दर्द बढ़ता चला जाता है और शरीर पर अत्यधिक प्रतिक्रिया होती है।
एक स्टडी के अनुसार CRPS में सेंट्रल नर्वस सिस्टम हाइपर-सेंसिटिव हो जाता है। यानी शरीर की नसें दर्द, तापमान और ब्लड फ्लो को नियंत्रित नहीं कर पातीं।
CRPS को शॉर्ट सर्किट जैसा माना जाता है। यह केवल हड्डी टूटने या चोट तक सीमित नहीं है, बल्कि चोट के आसपास की नसें और उनका प्रतिक्रिया करने का तरीका भी इसमें शामिल होता है।
जब शरीर में यह कंडीशन बन जाती है, तो छोटी-सी चीज भी दर्द को बढ़ा देती है। जैसे हल्का छूना, कपड़ा लगना या हवा का स्पर्श ये सब भी बहुत दर्दनाक हो सकते हैं।
CRPS को अक्सर Suicide Disease (आत्महत्या वाली बीमारी) कहा जाता है। यह नाम इसलिए पड़ा क्योंकि इसमें होने वाला दर्द अत्यधिक तीव्र होता है। कई बार यह दर्द जन्म देने के समय के दर्द या शरीर का अंग कटने के दर्द से भी ज्यादा माना जाता है।
इसलिए कई मरीजों की मानसिक स्थिति भी कमजोर हो जाती है और वे निराशा में चले जाते हैं।
CRPS का सबसे बड़ा लक्षण तेज और लगातार दर्द है, लेकिन इसके साथ कई अन्य संकेत भी दिखते हैं-
1. दर्द के साथ त्वचा का रंग बदलना- प्रभावित हिस्से की त्वचा लाल, बैंगनी या धब्बेदार दिख सकती है। कई बार रंग में बदलाव अचानक हो जाता है।
2. जलन या ठंडक महसूस होना- कभी ऐसा लगता है कि त्वचा जल रही है। कभी ऐसा लगता है जैसे उस हिस्से पर बर्फ की ठंडक पड़ रही हो।
3. त्वचा बहुत संवेदनशील हो जाना- कपड़े का छूना भी दर्दनाक लगने लगता है। कुछ लोग तो पानी की हल्की छींट भी सहन नहीं कर पाते।
4. अंग भारी या अकड़ने जैसा महसूस होना- दर्द वाला हिस्सा भारी, सूजा हुआ या अकड़ता हुआ महसूस हो सकता है।कभी-कभी ऐसा लगता है कि यह अंग अपना नहीं रह गया।
CRPS का इलाज पूरी तरह से संभव नहीं माना जाता, इसलिए इसे अक्सर लाइलाज कहा जाता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि अगर समय रहते इसकी पहचान हो जाए तो दर्द को मैनेज किया जा सकता है।