पटना। बिहार की सियासत के लिए गुरुवार 5 मार्च बड़ा दिन है। दो दशक की राज्य की राजनीति को छोड़कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का रुख अब केंद्र की ओर है। केंद्र की NDA सरकार में उनका मंत्री बनना तय है। इसके साथ ही बिहार में BJP का पहली बार मुख्यमंत्री चुने जाने की भी चर्चा है। ऐसे में पांच प्रमुख नेताओं के नाम मुख्यमंत्री की रेस में प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। यह तय है कि जो भी नया सीएम होगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की पसंद का ही होगा।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद बिहार की राजनीति में भाजपा के मजबूत नेताओं में गिने जाते हैं। 1966 में जन्मे नित्यानंद राय लंबे समय से सक्रिय राजनीति का हिस्सा रहे हैं। लोकसभा पहुंचने से पहले वे राज्य की राजनीति में काफी सक्रिय रहे और साल 2000 से लगातार हाजीपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने जाते रहे। बाद में उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखा और लोकसभा सांसद बने। हाल ही के लोकसभा चुनाव में उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखते हुए केंद्र सरकार में जगह बनाई। भाजपा संगठन में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। वे बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं और उस दौरान उन्होंने पार्टी के जनाधार को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। संगठन और सरकार दोनों में लंबे अनुभव के कारण उन्हें बिहार में मुख्यमंत्री पद के संभावित चेहरों में भी देखा जा रहा है।
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी राज्य की राजनीति के तेजी से उभरते हुए नेताओं में शामिल हैं। उनका जन्म 16 नवंबर 1968 को मुंगेर जिले के लखनपुर गांव में हुआ था। उनके पिता शकुनी चौधरी भी बिहार की राजनीति के दिग्गज नेता रहे हैं, जो छह बार विधायक और एक बार सांसद चुने गए। सम्राट चौधरी ने 1990 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा। मई 1999 में राबड़ी देवी की सरकार में वे पहली बार बिहार के कृषि मंत्री बने। इसके बाद साल 2000 और 2010 में वे परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। वर्ष 2010 में उन्हें बिहार विधानसभा में विपक्ष का मुख्य सचेतक भी बनाया गया। उनकी राजनीति का एक अहम मोड़ 2014 में आया, जब उन्होंने आरजेडी के 13 विधायकों के साथ मिलकर एक बागी गुट बनाया और बाद में भाजपा में शामिल हो गए। इसके बाद वे 2014 में जीतनराम मांझी की सरकार में नगर विकास और आवास मंत्री के रूप में शपथ ली।
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विजय कुमार सिन्हा आज बिहार की राजनीति के प्रभावशाली नेताओं में शामिल हैं। साधारण परिवार से आने वाले विजय सिन्हा ने छात्र राजनीति से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया और धीरे-धीरे राज्य की मुख्यधारा की राजनीति में मजबूत पहचान बनाई। साल 2017 में उन्हें बिहार सरकार में श्रम संसाधन मंत्री बनाया गया। इसके बाद 2020 में वे बिहार विधानसभा के अध्यक्ष चुने गए। स्पीकर के तौर पर उनकी छवि एक सख्त और अनुशासित नेता की रही। हालांकि राजनीतिक परिस्थितियों के चलते 2022 में उन्हें यह पद छोड़ना पड़ा, जिसके बाद वे विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में सक्रिय रहे। बिहार की राजनीति में नया मोड़ जनवरी 2024 में आया, जब सरकार के पुनर्गठन के दौरान भाजपा की ओर से उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद 2025 के विधानसभा चुनाव में जीत मिलने पर एक बार फिर उन्हें डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी सौंपी गई।
बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता दिलीप जायसवाल का नाम भी संभावित चेहरों में लिया जा रहा है। 3 दिसंबर 1963 को खगड़िया जिले के गोगरी में जन्मे दिलीप जायसवाल लंबे समय तक भाजपा संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। वे 22 वर्षों से अधिक समय तक बिहार भाजपा के प्रदेश कोषाध्यक्ष रहे हैं और राज्य सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। फिलहाल वे बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
दीघा विधानसभा सीट से विधायक डॉ. संजीव चौरसिया का नाम भी संभावित चौंकाने वाले विकल्प के तौर पर चर्चा में है। उन्होंने 2015 में पहली बार दीघा सीट से जीत हासिल की और तब से सक्रिय राजनीति में हैं। भाजपा संगठन और चुनावी राजनीति में उनकी सक्रिय भूमिका मानी जाती है। वे बिहार में पार्टी संगठन और चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व वाली नई भाजपा हमेशा चौंकाने वाले फैसले करती रही है। इससे पहले जिन राज्यों में चुनाव हुए वहां मुख्यमंत्री के रूप में बड़े नामों की जगह नया लीडर उभरकर आया। मध्य प्रदेश में डॉ. मोहन यादव, छत्तीसगढ़ में विष्णु देव साय, राजस्थान में भजन लाल शर्मा, हरियाणा में नायब सैनी, ओडिशा में मोहन चरण मांझी और दिल्ली में रेखा गुप्ता, ये सभी भाजपा के ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिनका नाम सीएम की रेस या चर्चा में नहीं था। इसी तरह बिहार में भी किसी नए नेता को मुख्यमंत्री बनाकर बीजेपी चौंका सकती है।