अनिल अंबानी ED के सामने पेश :RCOM और ग्रुप कंपनियों पर 40 हजार करोड़ का कर्ज, 17-मंजिला घर 'अबोड' कुर्क

रिलायंस ग्रुप के पूर्व चेयरमैन अनिल अंबानी आज, 26 फरवरी, दिल्ली में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सामने पेश हुए। वे विदेशी मुद्रा नियमों के उल्लंघन और फंड डायवर्जन के मामले में पूछताछ के लिए गए थे। मामला उनके बैंकों से लिए गए लोन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है।
अनिल अंबानी ED क्यों गए?
अनिल अंबानी रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ के दूसरे दौर के लिए ED के सामने गए। आरोप है कि उनकी कंपनियों ने बैंकों से लिए गए लोन का गलत इस्तेमाल किया और विदेशी मुद्रा नियमों का उल्लंघन किया। इससे पहले अगस्त 2025 में उनसे पहली बार पूछताछ हुई थी।
रिलायंस कम्युनिकेशंस और ग्रुप कंपनियों का कर्ज
ED के मुताबिक, RCOM और उसकी ग्रुप कंपनियों पर देशी और विदेशी बैंकों का कुल ₹40,185 करोड़ का कर्ज है।
मुंबई का 17 मंजिला घर 'अबोड' क्यों कुर्क किया गया?
अनिल अंबानी के पाली हिल, मुंबई स्थित घर 'अबोड' को बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत कुर्क किया गया। इस घर की कीमत लगभग ₹3,716 करोड़ बताई गई है।
प्रोविजनल अटैचमेंट का मतलब
'प्रोविजनल अटैचमेंट' का मतलब है कि संपत्ति को कानूनी रूप से फ्रीज कर दिया गया है। यानी अनिल अंबानी इस घर को बेच नहीं सकते और न ही किसी को ट्रांसफर कर सकते हैं। अगर आरोप साबित होते हैं, तो यह प्रॉपर्टी ED के कब्जे में जा सकती है।
पहले भी कुर्क हुआ था हिस्सा
नवंबर 2025 में इसी केस में ED ने इस प्रॉपर्टी का एक हिस्सा पहले कुर्क किया था, जिसकी कीमत ₹473.17 करोड़ थी। अब पूरी इमारत को कुर्क कर लिया गया है।
अब तक कुल कितनी संपत्ति कुर्क हुई
इस केस में अब तक कुल कुर्क की गई संपत्तियों की वैल्यू लगभग ₹15,700 करोड़ पहुंच गई है। ED यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत कर रही है।
अनिल अंबानी की मुश्किलें क्यों बढ़ीं?
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद, जांच एजेंसी ने ADAG के खिलाफ बैंक धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई है। इसी वजह से जांच अब तेज़ी से आगे बढ़ रही है।
मुकेश अंबानी का इस केस से कोई लेना-देना?
नहीं। मुकेश अंबानी इस केस से जुड़ा नहीं है। यह मामला केवल अनिल अंबानी और उनके ग्रुप कंपनियों से संबंधित है।
अनिल अंबानी के बयान और कंपनी के दस्तावेज़ों का मिलान किया जाएगा। अगर गड़बड़ी के ठोस सबूत मिले, तो गिरफ्तारी या नई चार्जशीट दाखिल हो सकती है।











