मुंबई। आर्थिक धोखाधड़ी के मामले में सजा काटने के बाद जेल से बाहर आए बॉलीवुड के लोकप्रिय हास्य अभिनेता राजपाल यादव एक बार फिर अपने करियर को पटरी पर लाने की कोशिश में जुट गए हैं। कभी अपनी कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले राजपाल आज खुले तौर पर यह स्वीकार कर रहे हैं कि वे फिल्मों में काम मांग रहे हैं। उनका कहना है कि अभिनय ही उनकी पहचान है और वे इसे किसी भी हाल में छोड़ना नहीं चाहते। जेल में बिताया समय उनके लिए कठिन जरूर रहा, लेकिन इसने उन्हें मानसिक रूप से और अधिक मजबूत बना दिया।
जब राजपाल यादव कानूनी संकट से जूझ रहे थे, तब फिल्म इंडस्ट्री के कई साथियों ने नैतिक समर्थन दिया। फिल्म अभिनेता सोनू सूद, अजय देवगन, सिंगर मीका सिंह, कॉमेडियन जॉनी लीवर समेत अनेक कलाकारों ने उनकी मदद के लिए हाथ बढ़ाया था। गायन जगत से जुड़े कुछ कलाकारों, जिनमें उदित नारायण जैसे नाम शामिल बताए जाते हैं, ने भी निजी स्तर पर उनका मनोबल बढ़ाया। भले ही यह मदद आर्थिक रूप से सामने न आई हो, लेकिन इस भावनात्मक समर्थन ने उन्हें टूटने से बचाए रखा।
राजपाल यादव का फिल्मी सफर आसान नहीं रहा। उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे से निकलकर उन्होंने मुंबई में संघर्ष किया और धीरे-धीरे अपने लिए जगह बनाई। उनकी शुरुआती फिल्मों में छोटे किरदार थे, लेकिन उनकी प्रतिभा ने जल्द ही दर्शकों का ध्यान खींचा। फिल्मों जैसे मैं, मेरी पत्नी और वो और हंगामा ने उन्हें पहचान दिलाई। इसके बाद उनकी कॉमिक टाइमिंग ने उन्हें बॉलीवुड के सबसे भरोसेमंद हास्य कलाकारों में शामिल कर दिया।
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राजपाल यादव ने कई सुपरहिट फिल्मों में अपने अभिनय से अलग पहचान बनाई। चुप चुप के, मालामल वीकली, भूल भुलैया जैसी फिल्मों में उनके किरदार आज भी दर्शकों को याद हैं। उनका अंदाज ऐसा रहा कि वे किसी भी गंभीर कहानी में हल्कापन ला देते थे। यही वजह है कि एक समय वे हर बड़े बैनर की फिल्मों का हिस्सा हुआ करते थे। उनकी मौजूदगी फिल्म की मनोरंजन वैल्यू बढ़ाने की गारंटी मानी जाती थी।
जेल से रिहाई के बाद राजपाल यादव अब नए जोश के साथ वापसी की कोशिश कर रहे हैं। वे खुद निर्देशकों और निर्माताओं से संपर्क कर रहे हैं और काम मांगने में कोई झिझक महसूस नहीं करते। उनका मानना है कि एक कलाकार का असली धर्म अभिनय है। उनके प्रशंसक भी उन्हें फिर से बड़े पर्दे पर देखने के लिए उत्सुक हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि बॉलीवुड उन्हें दूसरा मौका कब और कैसे देता है।
अभिनेता राजपाल यादव ने अपनी फिल्म अता पता लापता बनाने के लिए वर्ष 2010 में एक निजी कंपनी से लगभग 5 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। समझौते के अनुसार तय समय पर राशि लौटानी थी, लेकिन फिल्म अपेक्षित सफलता नहीं पा सकी और वे भुगतान नहीं कर सके। मामला अदालत पहुंचा और धीरे-धीरे मूल रकम पर ब्याज जुड़ता गया। कानूनी प्रक्रिया के दौरान कर्ज बढ़कर करीब 9 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। चेक बाउंस और धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में अदालत ने उन्हें सजा सुनाई थी, जिसके चलते उन्हें जेल भी जाना पड़ा।