आंध्र प्रदेश के लिए बड़ा फैसला लेते हुए केंद्र सरकार ने अमरावती को राज्य की आधिकारिक और स्थायी राजधानी घोषित कर दिया है। इसके लिए भारत सरकार ने 6 अप्रैल 2026 को गजट नोटिफिकेशन जारी किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद यह फैसला लागू हुआ। उन्होंने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (Amendment) Act, 2026 को मंजूरी दी थी, जिसे हाल ही में संसद ने पास किया था।
कानून मंत्रालय की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, यह नया कानून 2 जून 2024 से प्रभावी माना जाएगा। इस संशोधन के जरिए आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 में बदलाव किया गया है। इसके तहत अमरावती के साथ वह पूरा क्षेत्र भी राजधानी माना जाएगा, जिसे आंध्र प्रदेश कैपिटल रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी अधिनियम के तहत राजधानी क्षेत्र घोषित किया गया था।
संसद ने 2 अप्रैल 2026 को इस बिल को अंतिम मंजूरी दी। राज्यसभा ने बिल को वॉइस वोट से पास किया। इससे एक दिन पहले लोकसभा ने भी इसे मंजूरी दे दी थी। इस कानून के लागू होने के बाद तीन-राजधानी मॉडल की चर्चा खत्म हो गई और अब भविष्य में राजधानी बदलना लगभग असंभव माना जा रहा है।
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संसद में इस बिल पर करीब 35 सांसदों ने चर्चा की। ज्यादातर सांसदों ने बिल का समर्थन किया, लेकिन YSR Congress Party के दो सांसदों ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि इससे उन किसानों के हितों की अनदेखी हुई है, जिन्होंने राजधानी परियोजना के लिए अपनी जमीन दी थी।
अमरावती को राजधानी बनाने की योजना की शुरुआत 2015 में हुई थी, जब राज्य में Telugu Desam Party की सरकार थी। लेकिन 2019 में YSR Congress Party के सत्ता में आने के बाद अमरावती के कई प्रोजेक्ट रोक दिए गए और तीन-राजधानी मॉडल का प्रस्ताव सामने आया।
इसके बाद 2024 में एनडीए गठबंधन के सत्ता में लौटने पर अमरावती को एकमात्र राजधानी बनाने का फैसला किया गया और रुके हुए प्रोजेक्ट फिर से शुरू कर दिए गए। अब नए कानून के बाद अमरावती को आधिकारिक तौर पर आंध्र प्रदेश की स्थायी राजधानी का दर्जा मिल गया है।