US-Iran Talks :60 दिनों की परीक्षा शुरू, स्विट्जरलैंड में आमने-सामने अमेरिका-ईरान; परमाणु कार्यक्रम से लेकर 6 अरब डॉलर तक होगी बड़ी डील?

कई सालों से तनाव और टकराव के दौर से गुजर रहे अमेरिका और ईरान अब बातचीत की मेज पर आमने-सामने बैठने जा रहे हैं। दोनों देशों के बीच हाल ही में हुए अंतरिम शांति समझौते के बाद रविवार को स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में पहली बड़ी वार्ता होगी। इस बैठक में परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों में राहत, क्षेत्रीय सुरक्षा, लेबनान संघर्ष और फ्रीज किए गए अरबों डॉलर के फंड जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। माना जा रहा है कि इस बातचीत का नतीजा तय करेगा कि दोनों देशों के रिश्ते आगे बढ़ेंगे या फिर तनाव दोबारा बढ़ सकता है।
कौन-कौन होगा बैठक में शामिल?
स्विट्जरलैंड में होने वाली इस हाई-लेवल बैठक में अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शामिल होंगे। वहीं ईरान का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री अब्बास अराघची, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और केंद्रीय बैंक प्रमुख अब्दोलनासेर हेम्मती करेंगे।
इस बैठक में पाकिस्तान भी मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर भी बैठक में मौजूद रहेंगे। माना जा रहा है कि कतर के साथ मिलकर पाकिस्तान दोनों देशों के बीच भरोसा बनाने की कोशिश करेगा।
परमाणु कार्यक्रम रहेगा सबसे बड़ा मुद्दा
अमेरिका चाहता है कि बातचीत के पहले चरण में ईरान संयुक्त राष्ट्र (UN) के निरीक्षकों को अपने परमाणु ठिकानों का निरीक्षण करने की अनुमति दे। ये वही साइट्स हैं, जहां पहले अमेरिका और इजरायल द्वारा सैन्य हमले किए जा चुके हैं।
बताया जा रहा है कि, जून 2025 के बाद से संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षक इन परमाणु ठिकानों का दौरा नहीं कर पाए हैं। अमेरिका का मानना है कि निरीक्षण से ईरान के परमाणु कार्यक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और आगे की बातचीत के लिए भरोसे का माहौल बनेगा।
ईरान को मिल सकती है 6 अरब डॉलर की राहत
अगर ईरान परमाणु साइट्स के निरीक्षण के लिए सहमत होता है, तो अमेरिका भी आर्थिक राहत देने के लिए तैयार है। शुरुआती चरण में कतर में फ्रीज पड़े करीब 6 अरब डॉलर के फंड तक ईरान को सीमित पहुंच मिल सकती है। हालांकि, इस रकम का इस्तेमाल केवल मानवीय जरूरतों जैसे खाद्य सामग्री, दवाइयों और आवश्यक वस्तुओं की खरीद के लिए ही किया जा सकेगा।
60 दिनों में निकालना होगा स्थायी समाधान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच हुए अंतरिम समझौते के तहत दोनों देशों ने विवादों के समाधान के लिए 60 दिनों की समय-सीमा तय की है। इस अवधि में परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध, लेबनान में संघर्ष विराम, क्षेत्रीय सुरक्षा और अन्य विवादित मुद्दों पर स्थायी समाधान तलाशने की कोशिश होगी।
जेडी वेंस ने बताया बैठक का उद्देश्य
स्विट्जरलैंड रवाना होने से पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि, इस बैठक का सबसे बड़ा उद्देश्य आगे की बातचीत के लिए एक मजबूत और स्पष्ट ढांचा तैयार करना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि, परमाणु कार्यक्रम और इजरायल-लेबनान तनाव जैसे मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति हो सकती है। वेंस का कहना है कि सुर्खियों में हालात जितने तनावपूर्ण दिखाई दे रहे हैं, जमीन पर स्थिति उससे कुछ बेहतर है।
इजरायल-लेबनान तनाव भी बना बड़ी चुनौती
हालांकि बातचीत की राह आसान नहीं मानी जा रही है। लेबनान में इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच जारी संघर्ष इस प्रक्रिया के सामने बड़ी चुनौती बन सकता है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू घरेलू राजनीतिक दबाव के चलते हिज्बुल्लाह के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखना चाहते हैं। ऐसे में किसी भी बड़े समझौते में बाधा आ सकती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी बनी हुई है नजर
बातचीत से पहले होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी तनाव देखने को मिला। ईरान की ओर से इसे बंद करने की चेतावनी दी गई थी, हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि, फिलहाल इस समुद्री मार्ग से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही सामान्य बनी हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रतिदिन लाखों बैरल कच्चा तेल इसी समुद्री मार्ग से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है। इसलिए इस क्षेत्र की स्थिरता पूरी दुनिया के लिए अहम मानी जाती है।
ट्रंप ने भी दिया बड़ा संकेत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि, 60 दिनों की वार्ता अवधि के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि, अगर अंतिम समझौता नहीं हो पाया तो भविष्य में नई आर्थिक और रणनीतिक नीतियों पर विचार किया जा सकता है।
पहले दौर की बातचीत का संभावित एजेंडा
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मुद्दा |
क्या हो सकती है चर्चा |
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परमाणु कार्यक्रम |
संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों को परमाणु साइट्स तक पहुंच |
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आर्थिक राहत |
कतर में फ्रीज 6 अरब डॉलर के फंड तक सीमित पहुंच |
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प्रतिबंध |
भविष्य में अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत |
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लेबनान संघर्ष |
संघर्ष विराम और क्षेत्रीय स्थिरता |
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क्षेत्रीय सुरक्षा |
पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की रणनीति |
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भविष्य की वार्ता |
60 दिनों के रोडमैप पर सहमति |
बैठक में शामिल प्रमुख प्रतिनिधि
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देश |
प्रतिनिधि |
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अमेरिका |
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस |
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ईरान |
विदेश मंत्री अब्बास अराघची, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ, केंद्रीय बैंक प्रमुख अब्दोलनासेर हेम्मती |
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पाकिस्तान |
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर |
क्यों अहम है यह बैठक?
यह बैठक केवल अमेरिका और ईरान के रिश्तों तक सीमित नहीं है। इसके नतीजे पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा, वैश्विक तेल बाजार और क्षेत्रीय राजनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं। अगर शुरुआती दौर की बातचीत सकारात्मक रहती है, तो अगले 60 दिनों में दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों को सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है। वहीं अगर वार्ता विफल रहती है, तो क्षेत्र में तनाव एक बार फिर बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।











