Hemant Nagle
10 Jan 2026
संतोष चौधरी, भोपाल। अंबानी परिवार के वनतारा की तर्ज पर जबलपुर में 85-100 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित आधुनिक फॉरेस्ट सफारी, जू कम रेस्क्यू सेंटर और संग्रामपुर तालाब के समग्र विकास के लिए विदेशी कंपनी ने भी दिलचस्पी दिखाई है। 280 करोड़ लागत वाले इस प्रोजेक्ट के तहत मदन महल क्षेत्र में चिड़ियाघर, रेस्क्यू सेंटर, विभिन्न इंटरप्रिटेशन सेंटर बनेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के पर्यावरणीय परामर्श एवं संबद्ध सेवाओं के लिए कंसलटेंसी एजेंसी नियुक्त करने एनवॉयर्नमेंटल प्लानिंग एंड कोऑर्डिनेशन ऑर्गनाइजेशन (एप्को) को जिम्मेदारी सौंपी गई है। एप्को ने प्रोजेक्ट की डीपीआर बनाने के लिए टेंडर (ईओआई) जारी की थी। इसमें 4 एजेंसियों ने बतौर कंसलटेंसी दिलचस्पी दिखाई है। एजेंसी को 20 वर्ष के लिए मास्टर प्लान तैयार करना होगा।
मेहता एंड एसोसिएट्स इंदौर, जैन एंड एसोसिएट्स हरियाणा, मालंचा कोलकाता और एजिस इंडिया कंसलटिंग इंजीनियरिंग गुड़गांव, हरियाणा ने टेंडर भरे थे। टेंडर खोले गए, जिसमें एजिस इंडिया बेहतर पाई गई है। इसका परीक्षण कराया जा रहा है। यह कंपनी एक विदेशी कंपनी का जॉइंट वेंचर है। नियम है कि फॉरेस्ट से जुड़े प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले सुप्रीम कोर्ट की अनुमति लेना जरूरी है। इससे पहले केंद्रीय सेंट्रल जू अथॉरिटी (सीजेडए) से विधिवत अनुमति ली जाएगी। हालांकि सीजेडए से सैद्धतिक मंजूरी मिल चुकी है।
इस बारे में पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह का कहना है कि डीपीआर अगले तीन माह में तैयार कर ली जाएगी। इसके बाद विकास कार्यों की शुरुआत होगी। यह परियोजना न केवल जबलपुर को पर्यटन के क्षेत्र में वैश्विक पहचान दिलाएगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर, पर्यावरण संरक्षण, और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगी। पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ शुभरंजन सेन का कहना है कि इस प्रोजेक्ट की डीपीआर बनाने की जिम्मेदारी एप्को को सौंपी गई है। उसकी टेंडर प्रक्रिया जारी है। डीपीआर बनने के बाद सीजेडए और सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वहीं एप्को के कार्यकारी निदेशक दीपक आर्य ने कहा कि दूसरी बार ईओआई बुलाई गई थी। इसमें चार एजेंसियां ने दिलचस्पी दिखाई है। इसके टेंडर खोले गए हैं। टेक्निकल बिड हो चुकी है। विभिन्न पहलुओं का परीक्षण कराया जा रहा है। सोमवार तक एजेंसी का नाम फाइनल हो सकता है।