अजित पवार का राजनीतिक सफर :चाचा की छत्रछाया में आगे बढ़े, छह बार डिप्टी सीएम, कृषि, ग्रामीण विकास, सिंचाई जैसे मंत्रालय भी संभाले

महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार का बुधवार को विमान दुर्घटना में निधन हो गया। अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति में एक छत्रप की तरह रहे। सरकारें आईं, गईं लेकिन वे हमेशा सियासत के केंद्र में रहे। छह बार वे महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम बने।
चाचा की छत्रछाया में आगे बढ़े, छह बार डिप्टी सीएम, कृषि, ग्रामीण विकास, सिंचाई जैसे मंत्रालय भी संभाले
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    मुंबई। अजित कुमार पवार की राजनीति में एंट्री उनके चाचा शरद पवार की छत्रछाया में हुई। शरद पवार महाराष्ट्र की राजनीति में स्थापित कांग्रेसी नेता थे, और अजित पवार के राजनीति में आने के बाद यह परिवार और भी प्रभावशाली हो गया। शरद पवार, जो पहले एक सहकारी चीनी कारखाने के बोर्ड के सदस्य बने थे, ने गांवों के आर्थिक विकास को समझा और उसी क्षेत्र में आगे बढ़ने का रास्ता तैयार किया। अजित पवार 1995 में बारामती से विधायक बने। इसके बाद साल 1995, 1999, 2004, 2009, 2014, 2019 और 2024 में विधायक बने। वे एक बार सांसद और और सात बार विधायक रहे।

    छह बार उप मुख्यमंत्री बने

    • 10 नवंबर 2010 – 25 सितंबर 2012
    • 25 अक्टूबर 2012 -26 सितंबर 2014
    • 23 नवंबर 2019- 26 नवंबर 2019
    • 30 दिसंबर 2012 – 29 जून 2022
    • 2 जुलाई 2023 – दिसंबर 2024
    • 5 दिसंबर 2024 - अब तक

    मंत्री पद और प्रमुख भूमिकाएं

    1. कृषि और बिजली राज्य मंत्री - जून 1991 से नवंबर 1992

    2. जल आपूर्ति, बिजली और योजना राज्य मंत्री - नवंबर 1992 से फरवरी 1993

    3. सिंचाई मंत्री, बागवानी- अक्टूबर 1999 से जुलाई 2004

    4. ग्रामीण विकास, जल आपूर्ति और स्वच्छता, सिंचाई मंत्री- जुलाई 2004 से नवंबर 2004

    5. जल संसाधन मंत्री (कृष्णा घाटी सिंचाई को छोड़कर), जल संसाधन और स्वच्छता- नवंबर 2004 से नवंबर 2009

    6. जल संसाधन मंत्री (कृष्णा घाटी और कोंकण सिंचाई को छोड़कर), ऊर्जा - नवंबर 2009 से नवंबर 2010

    2019 में हुआ राजनीतिक उलटफेर

    2019 का वर्ष अजित पवार के लिए राजनीतिक रूप से बहुत नाटकीय था। शरद पवार के खिलाफ उनकी पहली बगावत ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी। अजित पवार ने देवेन्द्र फड़नवीस को सीएम बनाने के लिए बीजेपी के साथ अप्रत्याशित गठबंधन किया और खुद उपमुख्यमंत्री बन गए। हालांकि, सिर्फ तीन दिन बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया और बीजेपी से समर्थन वापस ले लिया, जिसके परिणामस्वरूप फड़नवीस को भी इस्तीफा देना पड़ा।

    दिसंबर 2019 में वापसी

    अजित पवार दिसंबर 2019 में अपने चाचा शरद पवार के साथ वापस महा विकास अघाड़ी (MVA) सरकार में शामिल हो गए। इस बार वह उपमुख्यमंत्री बने और यह कदम उनकी अपनी स्थिति को फिर से मजबूत करने और एनसीपी में अपनी शक्ति को साबित करने की रणनीति का हिस्सा था। 

    2023 में पुनः विद्रोह 

    2023 में महा विकास अघाड़ी सरकार के पतन के बाद, अजित पवार ने एक बार फिर अपनी पार्टी में विभाजन किया और भाजपा-शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के साथ गठबंधन कर लिया।

    2024 का चुनाव और नए प्रयास

    2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में अजित पवार ने एक बार फिर अपने दम पर पार्टी को संभाला। हालांकि, 2024 में उन्हें शुरुआत में कम आंका गया था, लेकिन चुनाव परिणामों ने सबको चौंका दिया। अजित पवार ने महायुति गठबंधन की 41 सीटों के साथ अपनी राजनीतिक पकड़ साबित की और यह जीत उनके लिए बड़ी उपलब्धि मानी गई।

    पत्नी सुनेत्रा राज्यसभा सांसद, बेटा चुनाव हार गया 

    अजित पवार की शादी महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री पदमसिंह बाजीराव पाटिल की बेटी सुनेत्रा पवार से हुई है। उनके दो बेटे हैं, जय पवार और पार्थ पवार। जय पवार ने व्यापार क्षेत्र में खुद को स्थापित किया है, जबकि पार्थ ने राजनीति में कदम रखा और 2019 में मावल लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा, हालांकि वह हार गए।

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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