घरेलू हवाई यात्रियों के लिए बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने एयरलाइंस पर लगी किराए की अधिकतम सीमा (फेयर कैप) हटा दी है। अब 23 मार्च 2026 से एयरलाइन कंपनियां सीटों की मांग और बाजार की स्थिति के हिसाब से टिकट के दाम तय कर सकेंगी। यानी आने वाले दिनों में फ्लाइट टिकट सस्ते भी हो सकते हैं और पीक समय में काफी महंगे भी।
सरकार ने पिछले साल दिसंबर में इंडिगो की फ्लाइट्स में भारी रुकावट और कैंसिलेशन के बाद किराए पर कैप लगाया था। उस समय अधिकतम किराया ₹18,000 तय किया गया था ताकि यात्रियों को राहत मिल सके। अब मंत्रालय का कहना है कि हालात सामान्य हो चुके हैं, उड़ानों की क्षमता बहाल हो गई है इसलिए समीक्षा के बाद यह सीमा हटाने का फैसला लिया गया है।
DGCA ने 1 नवंबर से पायलट और क्रू मेंबर्स के काम के घंटों (FDTL नियम) में बदलाव किया था। इससे इंडिगो में स्टाफ की कमी हो गई और हजारों फ्लाइट्स कैंसिल हुई।
यात्रियों को मजबूरी में महंगे टिकट खरीदने पड़े थे।
मंत्रालय ने साफ किया है कि भले ही फेयर कैप हटा दिया गया हो लेकिन एयरलाइंस को जिम्मेदारी से किराया तय करना होगा।
केंद्रीय एविएशन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर एविएशन सेक्टर पर पड़ सकता है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) किसी भी एयरलाइन की लागत का 35-45% हिस्सा होता है। ऐसे में तेल महंगा होने पर टिकट की कीमतों पर दबाव बढ़ना तय है।
सरकार ने भले ही निगरानी का भरोसा दिया है, लेकिन आने वाले समय में टिकट की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।