Naresh Bhagoria
6 Feb 2026
प्रवीण श्रीवास्तव,भोपाल। ऐसी घटनाएं जिसमें बड़ी संख्या में जनहानि हो, वहां शवों की जांच करना सबसे बड़ी समस्या होती है। पोस्टमार्टम में लंबा समय लगता है। कई बार तो रिपोर्ट के लिए भी महीनों इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में एम्स (AIIMS) भोपाल ने इसका विकल्प तलाशा है। दरअसल, एम्स भोपाल अब पारंपरिक पोस्टमार्टम की जगह वर्चुअल अटॉप्सी की शुरुआत करने जा रहा है। खास बात यह है कि एम्स भोपाल में वर्चुअल अटॉप्सी में सुपर स्पेशिलिटी कोर्स (डीएम) की मान्यता मिल गई है। यानी एम्स भोपाल अब देश को भी वर्चुअल अटॉप्सी तकनीक सिखाएगा।
इससे पहले एम्स ऋषीकेश में भी इस कोर्स को मान्यता दी गई है, लेकिन वहां अब तक एडमिशन नहीं हो सके, जबकि हमारे यहां एक सीट भर गई है। दरअसल, पारंपरिक पोस्टमार्टम में शवों को कई जगह से काटना पड़ता है। अक्सर परिजन शवों की ऐसी हालत के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं होते। सुप्रीम कोर्ट भी इस पर चिंता जता चुका है। यही नहीं दुनिया के कई देशों में वर्चुअल अटॉप्सी की शुरुआत हो चुकी है। लेकिन, यह पहला मौका है जब इसकी पढ़ाई कराई जा रही है।
एम्स के फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. राघवेन्द्र बिदुआ के मुताबिक वर्चुअल अटॉप्सी की प्रक्रिया आधे घंटे में पूरी हो सकती है। इसमें मृत शरीर को खोले बिना आंतरिक अंगों, हड्डियों और चोटों का विस्तृत विश्लेषण सीटी स्कैन और 3डी इमेजिंग जैसी तकनीकों का उपयोग से मृत्यु का कारण पता चलता है और इससे नतीजे तेज और सटीक मिलते हैं।