Margashirsha Month 2025:कार्तिक के बाद आया मार्गशीर्ष, श्रीकृष्ण की कृपा बरसाने वाला पावन महीना

कार्तिक माह के समाप्त होते ही मार्गशीर्ष मास की पवित्र शुरुआत होती है। इस साल इसका शुभारंभ 6 नवंबर गुरुवार से हो रहा है। इसे अगहन मास भी कहा जाता है, यह महीना मन को शांति और आत्मा को दिशा देता है। मान्यता है कि जो इस मास में श्रद्धा से भगवान श्रीकृष्ण की आराधना करता है, उसके जीवन में भक्ति, समृद्धि और मोक्ष तीनों का संगम होता है।
भगवान श्रीकृष्ण को प्रिय है मार्गशीर्ष
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मार्गशीर्ष माह भगवान श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय है। श्रीमद्भगवद्गीता में स्वयं भगवान ने कहा है- 'मासानां मार्गशीर्षोऽहम्' अर्थात् सभी महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूं। इसलिए यह महीना भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप माना गया है। इस दौरान उनकी पूजा और मंत्रजाप से मनोकामनाओं की पूर्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
मार्गशीर्ष माह में क्या करें
मार्गशीर्ष मास में कुछ खास धार्मिक कार्यों का बड़ा महत्व बताया गया है-
- यमुना स्नान का विशेष महत्व- भगवान श्रीकृष्ण ने कहा था कि जो व्यक्ति इस मास में यमुना में स्नान करता है, उसे उनकी कृपा सहज ही प्राप्त होती है।
- पाठ और जप करें- इस मास में भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की आराधना के लिए विष्णुसहस्त्रनाम, भगवद्गीता या गजेन्द्रमोक्ष स्तोत्र का प्रतिदिन पाठ शुभ फल देता है।
- दान करें- स्नान के साथ दान का भी अत्यधिक महत्व है। इस दौरान अपनी सामर्थ्य अनुसार अन्न, वस्त्र, या धन का दान ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को करें।
- तुलसी पूजन करें- भगवान की पूजा में तुलसी दल अर्पित करना आवश्यक माना गया है। शाम को तुलसी माता के पास शुद्ध घी का दीपक जलाना अत्यंत शुभ होता है।
मार्गशीर्ष माह का महत्व
यह महीना न सिर्फ भगवान श्रीकृष्ण की उपासना का काल है, बल्कि यह आध्यात्मिक जागरण और पुण्य प्राप्ति का अवसर भी देता है। श्रद्धा और भक्ति के साथ इस माह में पूजा-पाठ करने से भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की कृपा सहज ही प्राप्त होती है और जीवन में शांति, समृद्धि तथा सफलता का मार्ग खुलता है।












