वॉशिंगटन डीसी। अमेरिकी संसद में ग्रीनलैंड एनेक्शन एंड स्टेटडुड नाम से बिल पेश किया गया। सांसद रैंडी फाइन ने सोमवार को यह बिल पेश किया था। इस बिल का उद्देश्य अमेरिकी सरकार को ग्रीनलैंड पर कब्जे में लेना साथ जिसकी मदद से अमेरिका का राज्य बनाने के लिए कानूनी अधिकार देना है। रैंडी फाइन ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर इस बिल की जानकारी साझा की है।
अमेरिकी सांसद रैंडी फाइन ने बिल की जानकारी शेयर करते हुए इसे महत्वपूर्ण बताया। खासकर रूस और चीन के मद्देनजर इसे प्रभावी बताया है।आगे उन्होंने कहा कि इसके बाद राज्य सरकार को आवश्यक सुधारों की रिपोर्ट पेश की जाएगी। हालांकि इस प्रक्रिया में समय लग सकता है। लेकिन, इस कदम से अमेरिकी अपनी रणनीतिक चीजें जरूर मजबूत होंगी।
'ग्रीनलैंड एनेक्सेशन एंड स्टेटहुड एक्ट' नामक बिल अभी सिर्फ पेश किया गया है। आगे यह हाउस ऑफ रिप्रेंजेटिव यानी कि निचली सदन और फिर अपर हाउस यानी कि सीनेट में पेश किया जाएगा। हालांकि इस विष्य पर एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बिल काफी विरोध की स्थिति में फंसेगा जिसका पेश होना आसान नहीं होगा। दरअसल इसका कारण बिल का अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ है, दूसरी तरफ ग्रीनलैंड पर पिछले 300 सालों से डेनमार्क का कब्जा चल रहा है।
अमेरिका में ग्रीनलैंड को लेकर पेश किए गए बिल को पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का खुला समर्थन मिला है। ट्रम्प ने साफ शब्दों में कहा है कि ग्रीनलैंड अमेरिकी रक्षा के लिए बेहद जरूरी है। उनका कहना है कि अमेरिका को ग्रीनलैंड की जरूरत है और इस दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं, चाहे दूसरे देशों को यह पसंद आए या नहीं। ट्रम्प इससे पहले भी ग्रीनलैंड को रणनीतिक रूप से अहम बताते रहे हैं और इसे अमेरिका के प्रभाव क्षेत्र में लाने की बात कह चुके हैं।
ट्रंप प्रशासन के दौरान यहां तक चर्चा हुई थी कि ग्रीनलैंड के लोगों को अमेरिका में शामिल होने के बदले आर्थिक प्रलोभन दिए जा सकते हैं। इस सोच पर डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों ने कड़ी आपत्ति जताई थी और इसे अपमानजनक करार दिया था। उनका कहना था कि ग्रीनलैंड कोई सौदे की वस्तु नहीं है, बल्कि उसकी अपनी पहचान, संस्कृति और राजनीतिक स्थिति है।
इस बीच अमेरिकी सांसद कांग्रेसमैन रैंडी फाइन ने सोमवार को संसद में यह बिल पेश किया, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। अगर यह बिल पास होता है, तो ग्रीनलैंड की स्थिति में बड़े और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। बिल के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को विशेष अधिकार मिल जाएंगे, जिससे वे कानूनी रूप से जरूरी सभी कदम उठा सकेंगे। इनमें डेनमार्क के साथ औपचारिक बातचीत से लेकर अन्य कूटनीतिक और रणनीतिक उपाय शामिल होंगे, ताकि ग्रीनलैंड को अमेरिकी क्षेत्र में शामिल किया जा सके।
कब्जे की प्रक्रिया सफल होने की स्थिति में ग्रीनलैंड को अमेरिकी टेरिटरी का दर्जा मिल जाएगा। इसके बाद अगला कदम उसे अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की दिशा में बढ़ना होगा। इसके लिए राष्ट्रपति को कांग्रेस के सामने एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी, जिसमें यह बताया जाएगा कि ग्रीनलैंड को राज्य का दर्जा देने के लिए किन-किन फेडरल कानूनों में बदलाव जरूरी हैं।
आगे की प्रक्रिया में ग्रीनलैंड को अपना एक अलग संविधान तैयार करना होगा, जो अमेरिकी संविधान के अनुरूप होगा। इस संविधान को संसद की मंजूरी मिलने के बाद ग्रीनलैंड अमेरिका का पूर्ण राज्य बन सकता है, ठीक उसी तरह जैसे कभी अलास्का को राज्य का दर्जा दिया गया था। हालांकि, यह पूरा घटनाक्रम न सिर्फ डेनमार्क और ग्रीनलैंड, बल्कि वैश्विक राजनीति के लिए भी बड़े कूटनीतिक और कानूनी सवाल खड़े करता है।