नेशनल डेस्क। तमिलनाडु के सथानकुलम में पिता-पुत्र की हिरासत में मौत के चर्चित मामले में मदुरै की स्थानीय अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मदुरै के प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जी. मुथुकुमारन ने नौ पुलिसकर्मियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। इन सभी को वर्ष 2020 में थूथुकुडी जिले के सथानकुलम में व्यापारी पी. जयराज और उनके बेटे बेनिक्स की हिरासत में यातना और मौत का दोषी पाया गया। दोषी ठहराए गए पुलिसकर्मियों में तत्कालीन इंस्पेक्टर एस. श्रीधर, सब-इंस्पेक्टर पी. रघु गणेश और के. बालकृष्णन, हेड कांस्टेबल एस. मुरुगन और ए. सामीदुरई तथा कांस्टेबल एम. मुथुराजा, एस. वेल मुथु, एस. चेल्लादुरई और एक्स. थॉमस फ्रांसिस शामिल हैं।
अभियोजन के अनुसार 19 जून 2020 को जयराज अपने बेटे के मोबाइल शोरूम में मौजूद थे, तभी पुलिसकर्मी कथित रूप से कोविड-19 कर्फ्यू के बाद दुकान खुली रखने के आरोप में उन्हें थाने ले गए। जब बेनिक्स अपने पिता की रिहाई के लिए थाने पहुंचे तो पुलिसकर्मियों ने उनके सामने ही जयराज के साथ दुर्व्यवहार किया, जिसके बाद विवाद बढ़ गया। इसके बाद पिता और पुत्र को पूरी रात पुलिस स्टेशन में कथित तौर पर बेरहमी से प्रताड़ित किया गया।
घटना के बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और अगले दिन उन्हें कोविलपट्टी उप-जेल में रखा गया। पर्याप्त चिकित्सकीय देखभाल न मिलने के कारण उनकी हालत लगातार खराब होती गई। बेनिक्स की 22 जून 2020 को कोविलपट्टी सरकारी अस्पताल में मृत्यु हो गई, जबकि जयराज ने एक दिन बाद दम तोड़ दिया। इस मामले में कोविलपट्टी ईस्ट पुलिस स्टेशन में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई थीं।
शुरुआत में मामले की जांच सीबी-सीआईडी को दी गई थी, लेकिन बाद में इसे सीबीआई ने अपने हाथ में ले लिया। आरोपियों में शामिल एसएसआई पॉलदुरई की अगस्त 2020 में कोविड संक्रमण के कारण मृत्यु हो गई। सीबीआई ने 25 सितंबर 2020 को शेष नौ पुलिसकर्मियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की, जबकि 10 मार्च 2021 से मदुरै की प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत में सुनवाई शुरू हुई।
सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अगस्त 2022 में एक पूरक आरोपपत्र भी दाखिल किया। जांच में सामने आया कि दुकान तय समय से अधिक देर तक खुली नहीं थी और दोनों को झूठे मामले में फंसाया गया। एक महिला हेड कांस्टेबल के बयान के अनुसार पिता-पुत्र को पूरी रात प्रताड़ित किया गया और उन्हें अपने घावों से बहा खून स्वयं अपनी बनियान से साफ करने के लिए मजबूर किया गया।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार बेनिक्स के शरीर पर 13 और जयराज के शरीर पर 17 बाहरी चोटें पाई गईं। रिपोर्ट में बताया गया कि अधिकतर चोटें किसी कुंद वस्तु से लगी थीं और इन्हीं से उत्पन्न जटिलताओं के कारण उनकी मृत्यु हुई। चार साल से अधिक चली सुनवाई के बाद 23 मार्च को अदालत ने नौ पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया। सजा पर सुनवाई के दौरान सीबीआई के विशेष सरकारी वकील ने दलील दी कि यह मामला समाज को झकझोर देने वाला है और इसे ‘दुर्लभतम से दुर्लभ’ श्रेणी में रखा जाना चाहिए।
दोषियों की ओर से पेश वकीलों ने तर्क दिया कि घटना अचानक हुए विवाद का परिणाम थी और इसे ‘दुर्लभतम से दुर्लभ’ श्रेणी में नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने अदालत से कम सजा देने की मांग की। वहीं पीड़ित पक्ष के वकील ने कहा कि पूरी रात लगातार मारपीट से यह स्पष्ट है कि आरोपी अपने कृत्य के परिणामों से अवगत थे। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले को ‘दुर्लभतम से दुर्लभ’ मानते हुए सभी नौ दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई।