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75 साल आजादी के बाद भी सरखंडी के ग्रामीण पेड़ और रस्सियों से नदी पार करने को मजबूर, प्रशासन पर उठे सवाल

गुना जिले से सिर्फ 15 किमी दूर सरखंडी की टपरा बस्ती के आदिवासी और दलित परिवार आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। गांव के बीच से बहने वाली नदी पर पुल न होने के कारण लोग पेड़ के तने और रस्सियों के सहारे नदी पार करते हैं।
75 साल आजादी के बाद भी सरखंडी के ग्रामीण पेड़ और रस्सियों से नदी पार करने को मजबूर, प्रशासन पर उठे सवाल
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    गुना जिले से सिर्फ 15 किमी दूर सरखंडी की टपरा बस्ती के आदिवासी और दलित परिवार आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। गांव के बीच से बहने वाली नदी पर पुल न होने के कारण लोग पेड़ के तने और रस्सियों के सहारे नदी पार करते हैं।

    बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए सबसे बड़ा खतरा

    गांव के अर्जुन अहिरवार ने बताया कि यहां करीब 24 परिवार रहते हैं। बारिश में नदी का जलस्तर बढ़ने से स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को रोजाना जान जोखिम में डालकर आना-जाना पड़ता है।

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    सालों से अनसुनी पुल की मांग

    ग्रामीणों का कहना है कि वे कई सालों से पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं। चुनाव के समय नेता वादे करते हैं, लेकिन जीत के बाद कोई सुनवाई नहीं होती। कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को आवेदन दिए गए, फिर भी स्थिति जस की तस है।

    विकास के दावों पर सवाल

    महज 15 किमी दूर इस गांव की हालत प्रशासन और सरकार के विकास दावों पर सवाल खड़े करती है। जब लोग आज भी रस्सियों और पेड़ों के सहारे नदी पार कर रहे हैं, तो योजनाओं की हकीकत सामने आती है।

    ग्रामीणों की अपील

    ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और सरकार से फिर मांग की है कि इस नदी पर जल्द से जल्द पक्का पुल बनाया जाए। उनका कहना है कि यह मांग सुविधा के लिए नहीं बल्कि सुरक्षित जीवन के लिए है।

    Shivani Gupta
    By Shivani Gupta

    शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...

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