अशोक गौतम, भोपाल। शहडोल के बाणसागर, मुरैना के रमौआ सहित मप्र के 24 डैम खतरे की जद में हैं। जल संसाधन विभाग की डैम सुरक्षा टीम ने बारिश से पहले ऐसे डैम को चिह्नित कर विभाग को रिपोर्ट सौंपी थी। इसके बाद इनकी सुरक्षा को लेकर कुछ उपाय किए गए थे। अब बारिश खत्म हो चुकी है, तो एक बार फिर से सर्वे करने की तैयारी है। इन डैम के मेंटेनेंस पर विश्व बैंक परियोजना के माध्यम से 100 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। यह सभी डैम 60 साल के अंदर के हैं। केंद्र सरकार ने दिसंबर-2021 में बांध सुरक्षा अधिनियम पास किया था। इसमें प्रदेश के छोटे से बड़े सभी डैम की सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य बांध सुरक्षा समिति के पास है। अधिनियम में बांध सुरक्षा के लिए फंड का भी प्रावधान है, लेकिन अभी तक मप्र सरकार ने इसके लिए बजट का प्रावधान नहीं किया है।
केरल में बाढ़ के बाद केंद्र सरकार ने राज्यों को सभी डैम के लिए इमरजेंसी एक्शन प्लान बनाने के निर्देश दिए हैं। यह प्लान हर साल जल संसाधन विभाग को बनाना होगा। इसमें अचानक डैम फूटने पर जन-धन हानि से बचाने के लिए प्लान तैयार होता है।
करीब पांच वर्ष पहले धार जिले का कारम बांध टूट गया था। पिछले वर्ष बारगी डैम में भी अचानक रिसाव होने लगा था। तब जल संसाधन विभाग हरकत में आया और रिसाव को कंट्रोल किया। अभी हाल ही में केरवा डैम पर बने पुल का स्लैब गिर गया था। इतना सब होने के बाद भी विभाग डैम की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। विभाग द्वारा डैम की सुरक्षा के लिए अलग से जो शाखा बनाई है, उसमें तीन-चार इंजीनियरों की टीम हैं। चीफ इंजीनियर का पद लंबे समय से प्रभारी के भरोसे है। चीफ इंजीनियर आरडी अहिरवार के पास बोधी, चंबल-बेतवा, डायरेक्टर अनुसंधान सहित कई प्रभार हैं।
प्रदेश में अंग्रेजों के जमाने के डैम आज भी मजबूत स्थिति में हैं। बुंदेलखंड में छतरपुर जिले के गंगऊ, ग्वालियर के तिगरा सहित मप्र के 59 डैम अंग्रेजों के जमाने के हैं। इन पर सरकार को न तो मेंटेनेंस राशि खर्च करनी पड़ती है और न ही इनकी देखरेख करनी होती है।
प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट कहते हैं कि प्रदेश में बी कैटेगरी के डैम की सुरक्षा और उसमें तमाम कमियों को दूर करने के लिए अभियान चलाया जाएगा। डैम की तत्काल सुरक्षा, सुधार और मरम्मत पर करीब पांच करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।