गुरु पूर्णिमा :सीहोर में गूंजेगा गुरु कृपा का संदेश, हजारों श्रद्धालु गुरु मंत्र दीक्षा लेकर लेंगे नशा छोड़ने का संकल्प

सीहोर। श्री राम गौशाला गो-तीर्थ क्षेत्र स्थित श्री केदारनाथ महादेव मंदिर परिसर एवं श्री माधव महाकाल आरोग्य आश्रम में इस वर्ष 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, आध्यात्म और सामाजिक जागरूकता का अनूठा संगम बनेगा। परम पूज्यनीय गुरुदेव पंडित दुर्गा प्रसाद कटारे बाबा एवं राष्ट्रीय संत, कथा व्यास, परम गौभक्त गुरुदेव पं. मोहितरामजी पाठक के सान्निध्य में आयोजित गुरु मंत्र दीक्षा महोत्सव में हजारों श्रद्धालु गुरु मंत्र ग्रहण कर नशा मुक्त जीवन का संकल्प लेंगे। आयोजन का उद्देश्य आध्यात्मिक चेतना के साथ समाज को व्यसनमुक्त और संस्कारित बनाना है।
गुरु मंत्र दीक्षा से जुड़ेगा समाज
गुरु पूर्णिमा महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। गुरु मंत्र दीक्षा के दौरान श्रद्धालुओं को संयमित, सात्विक और अनुशासित जीवन जीने की प्रेरणा दी जाएगी। आयोजन समिति का मानना है कि गुरु का मार्गदर्शन व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है और समाज में नैतिक मूल्यों को मजबूत करता है।
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'नशे से नहीं, नाम से नाता जोड़िए'
राष्ट्रीय संत पं. मोहितरामजी पाठक ने कहा कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं बल्कि पूरे परिवार और समाज को खोखला कर देता है। उन्होंने श्रद्धालुओं का आह्वान करते हुए कहा कि "नशे से नहीं, नाम से नाता जोड़िए। व्यसन नहीं, भजन को जीवन का आधार बनाइए। गुरु मंत्र अपनाइए और अपने जीवन को सफल बनाइए।" उनका कहना है कि आध्यात्मिक जीवन ही वास्तविक सुख और शांति का मार्ग है।
केदारनाथ धाम की कथा से मिला आस्था का संदेश
सत्संग के दौरान संत श्री ने भगवान केदारनाथ के प्राकट्य की पौराणिक कथा का वर्णन करते हुए बताया कि महाभारत युद्ध के बाद पांडव अपने परिजनों और गुरुओं के वध से व्यथित थे। पापों से मुक्ति पाने के लिए वे भगवान शिव की शरण में पहुंचे, लेकिन भगवान शिव बैल (नंदी) का रूप धारण कर गुप्तकाशी में छिप गए। भीम ने उन्हें पहचानकर पकड़ने का प्रयास किया, तभी शिव धरती में समा गए। उनका कूबड़ केदारनाथ में प्रकट हुआ और अन्य अंग हिमालय के अलग-अलग स्थानों पर प्रकट हुए, जिन्हें आज पंच केदार के रूप में पूजा जाता है।
गौ सेवा को बताया राष्ट्र निर्माण का आधार
गुरुदेव ने अपने संदेश में गौ सेवा और गौ संरक्षण का विशेष महत्व बताते हुए कहा कि जहां गौ सेवा होती है, वहां सुख, समृद्धि और ईश्वर की कृपा स्वतः प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि गौ रक्षा केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण का महान अभियान है और प्रत्येक व्यक्ति को इसमें अपनी भागीदारी निभानी चाहिए।
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पांच हजार श्रद्धालुओं के लिए प्रसादी की तैयारी
आश्रम के कोषाध्यक्ष जितेन्द्र तिवारी ने बताया कि प्रत्येक वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु गुरु मंत्र दीक्षा प्राप्त करते हैं। आयोजन समिति के अध्यक्ष तुलसीराम परमार के अनुसार इस वर्ष लगभग पांच हजार श्रद्धालुओं के लिए विशाल भोजन प्रसादी की व्यवस्था की गई है। आयोजन स्थल पर सेवा, सुरक्षा और व्यवस्थाओं की तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं।
भक्ति, सेवा और संस्कार का बनेगा केंद्र
गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान गुरु पूजन, वैदिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन, सत्संग, गौ पूजन, गुरु आशीर्वचन और विशाल प्रसादी का आयोजन होगा। आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं से इस पावन अवसर पर उपस्थित होकर गुरु कृपा का लाभ लेने, नशा मुक्त भारत के संकल्प को मजबूत करने तथा गौ सेवा के इस महाअभियान में सहभागी बनने की अपील की है। श्रद्धा, सेवा और संस्कार से परिपूर्ण यह आयोजन समाज को सकारात्मक दिशा देने का संदेश देगा।












