टूट कर बिखर गई TMC : पार्टी के 20 सांसद NDA को देंगे समर्थन, काकोली घोष का दावा

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार और विधायकों की बगावत से जूझ रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सामने अब एक नया राजनीतिक संकट खड़ा होता दिखाई दे रहा है। पार्टी की वरिष्ठ लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार के एक बयान ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। उन्होंने दावा किया है कि टीएमसी के करीब 20 सांसदों ने भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने का फैसला किया है।
स्पीकर को भेजा गया समर्थन पत्र
काकोली घोष दस्तीदार ने न्यूज एजेंसी से कहा कि 20 सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक पत्र लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भेजा गया है। इस पत्र के माध्यम से एनडीए के साथ राजनीतिक रूप से जुड़ने की इच्छा जताई गई है। दस्तीदार का कहना है कि इस फैसले की जानकारी औपचारिक रूप से लोकसभा अध्यक्ष को दे दी गई है।
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पार्टी के भीतर बढ़ता असंतोष
वर्तमान में टीएमसी के पास लोकसभा में 28 और राज्यसभा में 12 सांसद हैं। ऐसे में यदि 20 सांसदों का दावा सही साबित होता है, तो यह पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा। काकोली घोष ने यह भी कहा कि वह अभी भी लोकसभा में पार्टी की मुख्य सचेतक हैं और यह निर्णय अन्य सांसदों के साथ व्यापक चर्चा के बाद लिया गया है।
जनादेश का हवाला देकर लिया फैसला
दस्तीदार ने कहा कि सांसदों के इस समूह ने जनता के जनादेश का सम्मान करते हुए एनडीए के साथ जाने का निर्णय लिया है। उनके अनुसार, राजनीतिक परिस्थितियों और मतदाताओं के संदेश को देखते हुए भविष्य की राजनीति एनडीए के साथ रहकर करना अधिक उचित होगा। उन्होंने कहा कि यह कदम किसी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा का परिणाम नहीं, बल्कि बदलते राजनीतिक माहौल की प्रतिक्रिया है।
टीएमसी नेतृत्व की चुप्पी
हालांकि, टीएमसी नेतृत्व की ओर से अब तक इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें पार्टी के अगले कदम और संभावित घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।
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58 विधायकों ने बनाया अलग गुट बनाया
पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) इस समय अपने सबसे बड़े आंतरिक संकट से गुजर रही है। सबसे बड़ा झटका तब लगा जब टीएमसी के 80 विधायकों में से 58 विधायकों ने बागी खेमे का समर्थन करते हुए निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता माना है। बागी विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपकर अलग विधायी समूह के रूप में अपनी ताकत दिखाई।
राज्यसभा सांसद ने छोड़ी पार्टी
पार्टी के भीतर असंतोष केवल विधायकों तक सीमित नहीं है। हाल के दिनों में कई वरिष्ठ नेताओं ने नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं, जबकि कुछ नेताओं ने इस्तीफा भी दिया है। सबसे चर्चित घटनाक्रम तब सामने आया जब वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने पार्टी और राज्यसभा दोनों से इस्तीफा दे दिया। इसे टीएमसी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।इसके अलावा कई मेयर भी पद व पार्टी छोड़ चुके हैं।
पार्टी गठन के बाद पहली बार बड़ा झटका
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 1998 में गठन के बाद टीएमसी पहली बार इतने बड़े स्तर पर संगठनात्मक विभाजन का सामना कर रही है। इससे पहले पार्टी में कभी इतनी बड़ी टूट नहीं हुई, हालांकि समय-समय पर पार्टी के कई नेता बारी-बारी से पार्टी छोड़ते रहे हैं। इनमें शुभेंदु अधिकारी और हुमायुं कबीर जैसे नाम हैं।












