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16 हजार अधिक लोगों की जबरन कराई गई थी नसबंदी, जापान सरकार ने शुरू की पीड़ितों को मुआवजा देने की प्रक्रिया 

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16 हजार अधिक लोगों की जबरन कराई गई थी नसबंदी, जापान सरकार ने शुरू की पीड़ितों को मुआवजा देने की प्रक्रिया 
टोक्यो। जापान सरकार ने जबरन नसबंदी पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए एक नई प्रक्रिया की शुरुआत की है। यह पहल उन लोगों को राहत देने के लिए की गई है, जिन्होंने देश के खिलाफ मुकदमे दर्ज नहीं कराए हैं। यह कदम उस कानून के लागू होने के बाद उठाया गया है, जो देश के युद्ध के बाद के सबसे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों के मामलों से प्रभावित लोगों को मुआवजा देने के लिए बनाया गया है। जापान सरकार ने घोषणाा की है कि जबरन नसबंदी के शिकार प्रत्येक व्यक्ति को 15 मिलियन येन, उनके जीवनसाथियों को 5 मिलियन येन और गर्भपात कराने के लिए मजबूर किए गए लोगों को 2 मिलियन येन का एकमुश्त मुआवजा दिया जाएगा।

2018 से अब तक 39 पीड़ितों ने सरकार के खिलाफ दायर किए मुकदमे

सरकार के आंकड़ों के अनुसार 1948 से 1996 तक लागू रहे यूजेनिक्स संरक्षण कानून के तहत लगभग 25,000 लोगों की नसबंदी की गई थी, इनमें से 16,500 को उनकी सहमति के बिना नसबंदी कराई गई थी। इस कानून के तहत लगभग 59,000 मामलों में गर्भपात भी कराए गए थे। सरकार का अनुमान है कि वर्तमान में इन पीड़ितों में से 23,000 से अधिक लोग जीवित हैं। 2018 से अब तक 39 पीड़ितों ने मुआवजे के लिए सरकार के खिलाफ मुकदमे दायर किए हैं। हालांकि, कई पीड़ितों ने विभिन्न वजहों से इसके खिलाफ आवाज नहीं उठाई है। जापान के पीएम शिगेरू इशिबा ने ऐसे कुछ पीड़ितों से मुलाकात की और उनसे माफी मांगी। उन्होंने कहा, आपकी दर्दनाक यादों और भावनाओं को ध्यान में रखते हुए, हम यह सुनिश्चित करेंगे कि आप नई योजना के तहत मुआवजा प्राप्त कर सकें। इस मुद्दे पर जनता को जागरूक करने के लिए सरकार ने जापानी समाचार पत्रों में माफी का विज्ञापन भी छपवाया है।

मर चुके पीड़ित को भी मिलेगा मुआवजा

अक्टूबर 2024 में एक नया कानून पारित किया गया, जिसे बहुदलीय सांसदों के एक समूह ने प्रस्तावित किया था। यह कानून उस समय आया जब जापान के सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में यूजेनिक्स संरक्षण कानून असंवैधानिक करार देते हुए पीड़ितों को मुआवजा देने का आदेश दिया। इस कानून में 2019 में लागू एक अन्य कानून के तहत दी जाने वाली 3.2 मिलियन येन की एकमुश्त राशि से काफी अधिक मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है। यूजेनिक्स कानून के तहत, मानसिक विकलांगता, मानसिक रोग या वंशानुगत विकारों से पीड़ित व्यक्तियों की सहमति के बिना नसबंदी या गर्भपात की अनुमति दी गई थी। इस कानून का उद्देश्य अवांछनीय गुणों को जीन पूल में प्रवेश करने से रोकना था। अब मुआवजे की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए पीड़ितों या उनके परिवारों से अनुरोध किया गया है कि वे आवेदन करें। इस प्रक्रिया के तहत आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 16 जनवरी, 2030 तय की गई थी। नियमानुसार यदि कोई नसबंदी पीड़ित या उसका जीवनसाथी मर चुका है, तो मुआवजा उनके बच्चों, पोतों या भाई-बहनों को दिया जाएगा।

जारी किया जाएगा मेडिकल प्रमाणपत्र

नए कानून की प्रस्तावना में संसद और सरकार ने यूजेनिक्स कार्यक्रम लागू करने के लिए माफी मांगी। यह कानून 2019 में लागू एक अन्य कानून के तहत दिए गए 3.2 मिलियन येन की एकमुश्त राशि से कहीं अधिक मुआवजा प्रदान करता है। मुआवजा के लिए हानि की सीमा तय करने की जिम्मेदारी एक बोर्ड को सौंपी गई है। इसका लाभ लेने के लिए पीड़ितों को एक वकील उपलब्ध कराया जाएगा, जो उन्हें सभी जरूरी दस्तावेज तैयार करने में मदद करेगा। सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उन्हें एक मेडिकल प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा, जो इस बात का प्रमाण होगा उनकी नसबंदी की सर्जरी की गई थी या वे ऐसे लोगों के सगे संबंधी हैं। जुलाई 2024 में इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अवैध कृत्य के लिए 20 साल की समय सीमा, यूजेनिक्स कानून पर लागू नहीं होती। इसका मतलब है कि घटना भले ही पुरानी हो, लेकिन पीड़ित अब भी मुआवजे के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह जापान सरकार की ऐतिहासिक गलतियों को स्वीकार करने और पीड़ितों को न्याय देने की दिशा में की गई एक अहम पहल है। ये भी पढ़ें- नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने गो फर्स्ट एयरवेज के लिक्वीडेशन का आदेश दिया, कंपनी ने खुद को किया था दिवालिया घोषित
Wasif Khan
By Wasif Khan

फिलहाल जुलाई 2024 से पीपुल्स अपडेट में सब-एडिटर हूं। बीते 3 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हूं। 12वीं म...Read More

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