PlayBreaking News

‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान के बराबर दर्जा :मोदी कैबिनेट ने प्रस्ताव को दी मंजूरी, अपमान किया तो होगी जेल

केंद्र सरकार ने वंदे मातरम को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा देने का फैसला किया है। अब इसके अपमान या गायन में बाधा डालने पर सजा होगी। सरकार ने कानून में संशोधन और नई गाइडलाइन जारी की है। सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और राष्ट्रीय आयोजनों में इसके गायन को बढ़ावा दिया जाएगा।
Follow on Google News
मोदी कैबिनेट ने प्रस्ताव को दी मंजूरी, अपमान किया तो होगी जेल

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने ‘वंदे मातरम’ को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला लिया है, जिसके तहत इसे राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा देने की मंजूरी दी गई है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह अहम निर्णय लिया गया। इस फैसले के साथ ही राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम में संशोधन को भी मंजूरी दे दी गई है, जिससे अब ‘वंदे मातरम’ को कानूनी सुरक्षा भी मिलेगी।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब देश ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहा है। सरकार का मानना है कि इस ऐतिहासिक गीत को वह सम्मान मिलना चाहिए, जिसका वह हकदार है।

अब अपमान करने पर होगी सजा

कैबिनेट के फैसले के बाद अब ‘वंदे मातरम’ के साथ वही नियम लागू होंगे, जो वर्तमान में राष्ट्रगान पर लागू होते हैं। इसका मतलब है कि, अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर इस गीत के गायन में बाधा डालता है या इसका अपमान करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकेगी। 

मौजूदा कानून के तहत राष्ट्रगान के अपमान पर अधिकतम तीन साल की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। अब यही नियम ‘वंदे मातरम’ पर भी लागू होंगे। इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति दोबारा ऐसा अपराध करता है, तो उसके लिए कम से कम एक साल की सजा अनिवार्य होगी। सरकार इस बदलाव के लिए कानून की धारा-3 में संशोधन करने जा रही है, जिसमें पहले केवल राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े प्रावधान शामिल थे।

150वीं वर्षगांठ के मौके पर लिया गया फैसला

‘वंदे मातरम’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में की थी। यह गीत 1882 में उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में प्रकाशित हुआ। इस गीत ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लोगों को एकजुट करने और देशभक्ति की भावना जगाने में अहम भूमिका निभाई। सरकार का यह फैसला इस ऐतिहासिक गीत की 150वीं वर्षगांठ के मौके पर लिया गया है, जिससे इसे राष्ट्रीय जीवन में और मजबूती से स्थापित किया जा सके।

Breaking News

गाइडलाइन जारी, कैसे और कब गाया जाएगा

गृह मंत्रालय ने ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन गाइडलाइन के अनुसार, अब इसे सरकारी और औपचारिक कार्यक्रमों में निर्धारित तरीके से गाया जाएगा। गीत का पूरा आधिकारिक वर्जन, जिसमें छह अंतरे शामिल हैं, लगभग 3 मिनट 10 सेकंड में प्रस्तुत किया जाएगा। अगर किसी कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान दोनों का आयोजन होता है, तो पहले ‘वंदे मातरम’ और उसके बाद ‘जन गण मन’ गाया जाएगा। इसके अलावा, दर्शकों और उपस्थित लोगों को दोनों गीतों के दौरान सम्मान स्वरूप सावधान मुद्रा में खड़े रहना होगा।

किन अवसरों पर अनिवार्य होगा गायन

नई गाइडलाइन के अनुसार, ‘वंदे मातरम’ का गायन कई प्रमुख अवसरों पर किया जाएगा। इसमें राष्ट्रीय ध्वज फहराने के समय, राष्ट्रपति और राज्यपाल के कार्यक्रमों के दौरान, उनके भाषण से पहले और बाद में, सिविलियन अवॉर्ड समारोह और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी आयोजनों को शामिल किया गया है।
इसके साथ ही स्कूलों और कॉलेजों में दिन की शुरुआत ‘वंदे मातरम’ के सामूहिक गायन से करने की भी सिफारिश की गई है। सरकार का उद्देश्य है कि नई पीढ़ी में देशभक्ति और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान की भावना विकसित हो।

खड़े रहने का नियम और छूट

सरकार ने यह बताया कि ‘वंदे मातरम’ के दौरान सभी लोगों को सम्मान में खड़े रहना होगा। हालांकि, कुछ स्थितियों में छूट भी दी गई है। जैसे कि अगर यह गीत किसी फिल्म, डॉक्यूमेंट्री या मनोरंजन कार्यक्रम का हिस्सा है, तो दर्शकों को खड़े होने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। इसका कारण यह बताया गया है कि इससे देखने का अनुभव प्रभावित हो सकता है और भ्रम की स्थिति बन सकती है।

Featured News

शिक्षा संस्थानों में बढ़ेगा महत्व

सरकार ने स्कूलों और कॉलेजों में ‘वंदे मातरम’ के नियमित गायन को बढ़ावा देने का फैसला किया है। इसके तहत सुबह की प्रार्थना सभा में इसे शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर गीत के प्रिंटेड संस्करण भी वितरित किए जा सकते हैं, ताकि छात्र इसे सही तरीके से सीख सकें और समझ सकें। यह कदम युवाओं में राष्ट्रीय पहचान और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी रहा ‘वंदे मातरम’

‘वंदे मातरम’ हाल के समय में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी रहा है। संसद में इसके 150 वर्ष पूरे होने पर विशेष चर्चा हुई थी, जिसमें इसे राष्ट्रगान के बराबर दर्जा देने की मांग उठी थी। पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान भी इस गीत को राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया। भाजपा ने राज्यभर में इसके सामूहिक गायन और कार्यक्रम आयोजित किए, जिससे यह चुनावी बहस का केंद्र बन गया। दूसरी ओर विपक्ष ने समय-समय पर इस मुद्दे पर अलग-अलग राय रखी है और इसे राजनीतिक रूप से इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगाया है।

‘वंदे मातरम’ कैसे बना राष्ट्रगीत

‘वंदे मातरम’ का अर्थ है- हे मां, मैं तुम्हें नमन करता हूं। यह एक संस्कृत वाक्यांश है, जिसमें मातृभूमि को देवी के रूप में सम्मान दिया गया है। 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे पहली बार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में गाया था, जिसके बाद यह गीत राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय हो गया।1947 में आजादी से ठीक पहले संविधान सभा की पहली बैठक की शुरुआत भी ‘वंदे मातरम’ से हुई थी। बाद में 1950 में इसे आधिकारिक रूप से राष्ट्रगीत का दर्जा दिया गया।

एक नजर में वंदे मातरम के बारे में जानें

पहलू

जानकारी

रचयिता

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय

रचना वर्ष

1875

प्रकाशन

1882 (आनंदमठ)

पहली बार सार्वजनिक गायन

1896

राष्ट्रगीत का दर्जा

1950

कुल अंतरे

6

अवधि

3 मिनट 10 सेकंड

स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका

‘वंदे मातरम’ स्वतंत्रता संग्राम के दौरान एक नारा बन गया था, जिसने लाखों लोगों को ब्रिटिश शासन के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा दी। यह गीत केवल शब्दों का समूह नहीं था, बल्कि आजादी की लड़ाई का प्रतीक बन गया था। स्वतंत्रता सेनानियों के लिए यह गीत साहस, एकता और देशभक्ति का स्रोत था। यही कारण है कि आज भी इसका भावनात्मक और ऐतिहासिक महत्व बेहद गहरा है। 

Manisha Dhanwani
By Manisha Dhanwani

मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

नई दिल्ली
--°
बारिश: -- mmह्यूमिडिटी: --%हवा: --
Source:AccuWeather
icon

Latest Posts