Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

1300 साल का सबसे बड़ा सूखा !गंगा घाटी में जल संकट ने बढ़ाई चिंता, पहली बार इतनी भयावह स्थिति

गंगा घाटी में 1300 साल का सबसे भीषण सूखा दर्ज किया गया। कमजोर मानसून, बढ़ते तापमान और जल संकट ने स्थिति गंभीर बना दी है, वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी।
गंगा घाटी में जल संकट ने बढ़ाई चिंता, पहली बार इतनी भयावह स्थिति
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भारत में जल संकट तेजी से गहराता जा रहा है और इसका सबसे गंभीर असर गंगा नदी बेसिन पर देखने को मिल रहा है। हालिया अध्ययनों के अनुसार, गंगा घाटी ने 1991 से 2020 के बीच पिछले 1300 वर्षों का सबसे भीषण सूखा झेला है। कमजोर मानसून, बढ़ते तापमान और मानवीय गतिविधियों ने स्थिति को और खराब कर दिया है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकट और भयावह रूप ले सकता है।

    गंगा बेसिन बना सूखे का हॉटस्पॉट

    रिपोर्ट के मुताबिक गंगा के मैदानी इलाके 2009 से ही सूखे के बड़े केंद्र बन चुके हैं। 1971 से 2020 के बीच किए गए अध्ययन में पाया गया कि पश्चिमी और मध्य भारत, हिमालय, गंगा के मैदान, प्रायद्वीपीय और उत्तर-पूर्व भारत में सूखे की स्थिति लगातार बढ़ रही है। विशेष रूप से गंगा के मैदान, हिमालय और उत्तर-पूर्व भारत में नमी तेजी से घट रही है। इससे कृषि, जल आपूर्ति और प्राकृतिक संतुलन तंत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।

    कमजोर मानसून और बढ़ता तापमान बना कारण

    वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून के दौरान बारिश कम हो रही है। जबकि गर्मियों में वाष्पीकरण (evaporation) की दर तेजी से बढ़ रही है। दिन और रात दोनों समय तापमान में वृद्धि दर्ज की जा रही है, जिससे जमीन में मौजूद नमी तेजी से खत्म हो रही है। इसके अलावा, भूजल का ज्यादा उपयोग और अधिक पानी वाली फसलों की खेती ने समस्या को और गंभीर बना दिया है।

    ये भी पढ़ें: Patriot: लॉस एंजिल्स इंडियन फिल्म फेस्टिवल में ओपनिंग फिल्म बनेगी ‘पैट्रियट’, 18 साल बाद साथ दिखेंगे ममूटी और मोहनलाल

    1300 साल का सबसे तीव्र सूखा

    सितंबर 2025 में जारी एक अध्ययन में बताया गया कि गंगा नदी घाटी ने 1991-2020 के दौरान पिछले 1300 वर्षों का सबसे तेज सूखा देखा। पेड़ों के छल्लों के विश्लेषण से यह सामने आया कि यह सूखा 16वीं सदी के सूखों से भी 76% अधिक तीव्र था। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सिर्फ प्राकृतिक कारणों से नहीं, बल्कि मानव गतिविधियों का भी परिणाम है।

    उत्तर-पूर्व भारत भी संकट में

    पहले जहां उत्तर-पूर्व भारत में भारी बारिश होती थी। अब वहां भी स्थिति बदल रही है। कमजोर मानसून और बढ़ती गर्मी ने इस क्षेत्र में भी जल संकट पैदा कर दिया है। इस बदलाव ने पारंपरिक जल संसाधनों और कृषि प्रणाली को प्रभावित किया है, जिससे स्थानीय लोगों की आजीविका पर असर पड़ रहा है।

    ये भी पढ़ें: खौफनाक हमला : बंदरों के झुंड ने 65 वर्षीय महिला को घेरा, हुई मौत

    ‘पानी का दिवालियापन’ बनती स्थिति

    विशेषज्ञ अब इस स्थिति को सिर्फ सूखा नहीं बल्कि पानी का दिवालियापन बता रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय की रिपोर्ट के अनुसार पानी अब केवल संसाधन नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बन चुका है। अगर जल प्रबंधन में सुधार नहीं किया गया, तो भविष्य में देशों के बीच पानी को लेकर संघर्ष भी हो सकता है।

    समाधान क्या हो सकते हैं?

    वैज्ञानिकों का मानना है कि इस संकट से निपटने के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल जरूरी है। जैंसे- 

    1. ड्रिप इरिगेशन
    2. सौर ऊर्जा से चलने वाले पंप
    3. पानी का पुन: उपयोग
    4.  समुद्री पानी को मीठा बनाने की तकनीक

    हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इन उपायों के साथ संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है, क्योंकि गलत उपयोग से समस्या और बढ़ सकती है।

    दूसरे देशों से सीखने की जरूरत

    इजरायल और कैलिफोर्निया जैसे क्षेत्रों ने सूखे के बावजूद अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखा है। उन्होंने कृषि पर निर्भरता कम कर सेवा और उद्योग क्षेत्र को बढ़ावा दिया। भारत भी इन उदाहरणों से सीख लेकर अपनी रणनीति को मजबूत कर सकता है।

    क्या करना होगा आगे?

    भारत में लगभग 85% पानी का उपयोग कृषि में होता है। ऐसे में खेती के तरीकों में बदलाव बेहद जरूरी है।

    1. कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा
    2. भूजल दोहन पर नियंत्रण
    3. आधुनिक सिंचाई तकनीकों का उपयोग
    4.  जल संरक्षण के पारंपरिक तरीकों को अपनाना

    इसके अलावा, जल संसाधनों की बेहतर निगरानी और डेटा संग्रह भी जरूरी है, ताकि समय रहते सही निर्णय लिए जा सकें।

    Sona Rajput
    By Sona Rajput

    माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

    Latest Posts