Earthquakeआखिर बार-बार क्यों आते हैं भूकंप, कैसे मापी जाती है इसकी तीव्रता?

अफगानिस्तान के हिंदूकुश क्षेत्र में शनिवार शाम 6.2 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान-ताजिकिस्तान सीमा के पास बताया गया। तेज झटकों का असर पाकिस्तान, भारत के उत्तरी हिस्सों, चीन, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान और तुर्कमेनिस्तान तक महसूस किया गया। ऐसे में एक बार फिर सवाल उठने लगा कि आखिर दुनिया के कई हिस्सों में बार-बार भूकंप क्यों आते हैं और इन्हें पहले से क्यों नहीं रोका जा सकता।
धरती के अंदर क्या होता है?
पृथ्वी कई विशाल टेक्टोनिक प्लेटों से बनी हुई है, जो लगातार बहुत धीमी गति से खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं, एक-दूसरे के नीचे धंसती हैं या रगड़ खाती हैं, तब उनके बीच लंबे समय से जमा ऊर्जा अचानक बाहर निकलती है। यही ऊर्जा भूकंपीय तरंगों के रूप में फैलती है और धरती कांपने लगती है।
फॉल्ट लाइन क्या होती है?
जहां दो टेक्टोनिक प्लेटें आपस में मिलती हैं, उस क्षेत्र को फॉल्ट लाइन कहा जाता है। दुनिया में अधिकांश बड़े भूकंप इन्हीं फॉल्ट लाइनों के आसपास आते हैं। यदि ऊर्जा का उत्सर्जन ज्यादा होता है तो भूकंप भी अधिक शक्तिशाली होता है और इसके झटके सैकड़ों किलोमीटर दूर तक महसूस किए जा सकते हैं।
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कैसे मापी जाती है भूकंप की तीव्रता?
भूकंप की तीव्रता मापने के लिए रिक्टर स्केल का उपयोग किया जाता है। भूकंप आने पर पृथ्वी के भीतर से निकलने वाली भूकंपीय तरंगों को उपकरणों की मदद से रिकॉर्ड किया जाता है। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर वैज्ञानिक यह तय करते हैं कि भूकंप कितना शक्तिशाली था और उसका केंद्र यानी एपिसेंटर कहां स्थित था।
भूकंप के दौरान क्या करें?
- मजबूत फर्नीचर का सहारा लें: यदि बाहर निकलना संभव न हो तो मजबूत टेबल या डेस्क के नीचे बैठ जाएं और सिर को सुरक्षित रखें।
- खुले स्थान पर जाएं: झटके थमते ही सीढ़ियों का इस्तेमाल करते हुए खुले मैदान या सुरक्षित जगह पर पहुंचें। लिफ्ट का उपयोग बिल्कुल न करें।
- खिड़कियों और भारी सामान से दूर रहें: कांच, अलमारी या गिरने वाली वस्तुओं से दूरी बनाए रखें ताकि चोट लगने का खतरा कम हो।
- वाहन चला रहे हों तो रुक जाएं: सुरक्षित स्थान पर गाड़ी रोककर वाहन के अंदर ही रहें। पुल, फ्लाईओवर या रैंप के नीचे या ऊपर वाहन खड़ा न करें।
क्या भूकंप की भविष्यवाणी संभव है?
वर्तमान समय में वैज्ञानिक भूकंप की सटीक तारीख, समय और स्थान की पहले से भविष्यवाणी नहीं कर सकते। हालांकि, भूकंप संभावित क्षेत्रों की पहचान, निगरानी और बेहतर चेतावनी प्रणालियों के जरिए नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसलिए जागरूकता और समय पर बचाव ही सबसे प्रभावी सुरक्षा उपाय माने जाते हैं।











