बंगाल के स्कूलों में अब गूंजेगा ‘वंदे मातरम’ :सरकार ने मॉर्निंग असेंबली में किया अनिवार्य

कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब स्कूलों की सुबह की प्रार्थना सभा में ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य होगा। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक नोटिस जारी कर सभी स्कूल प्रमुखों को तुरंत आदेश लागू करने के निर्देश दिए हैं।
नए आदेश के मुताबिक, कक्षाएं शुरू होने से पहले हर छात्र को सुबह की असेंबली में ‘वंदे मातरम’ गाना होगा। सरकार के इस फैसले के बाद स्कूल प्रशासन और प्रिंसिपलों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई है, क्योंकि पहले से ही राष्ट्रगान और राज्य गीत को लेकर नियम लागू हैं।
स्कूल शिक्षा विभाग ने जारी किया आदेश
स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि, राज्य के सभी स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान ‘वंदे मातरम’ का गायन सुनिश्चित किया जाए। सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के प्रमुखों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि, यह निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। साथ ही कई स्कूलों से इसकी रिकॉर्डिंग और पालन से जुड़ी रिपोर्ट भी मांगी जा सकती है।
पहले से लागू है राज्य गीत का नियम
दरअसल, पिछली सरकार के कार्यकाल में राज्य के स्कूलों में सुबह की सभा के दौरान रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा लिखित राज्य गीत ‘बांग्लार माटी, बांग्लार जल’ गाना अनिवार्य किया गया था। अब नई सरकार ने ‘वंदे मातरम’ को भी अनिवार्य कर दिया है। ऐसे में स्कूल प्रबंधन इस बात को लेकर उलझन में हैं कि, मॉर्निंग असेंबली में कौन-कौन से गीत शामिल किए जाएं।
स्कूलों के सामने नई चुनौती
कई स्कूल प्रमुखों का कहना है कि, राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को हटाना संभव नहीं है, क्योंकि यह राष्ट्रीय स्तर पर अनिवार्य है। ऐसे में अब स्कूलों के सामने तीन गीतों वंदे मातरम, बांग्लार माटी बांग्लार जल और जन गण मन को एक साथ शामिल करने की चुनौती खड़ी हो गई है। स्कूल प्रशासन का कहना है कि, अगर तीनों गीत गाए गए तो प्रार्थना सभा लंबी हो जाएगी और कक्षाएं शुरू होने में देरी होगी।
शिक्षा विभाग ने क्या कहा?
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, नए निर्देश में केवल ‘वंदे मातरम’ को अनिवार्य करने की बात कही गई है। राज्य गीत को लेकर नए आदेश में कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि, राष्ट्रीय और सांस्कृतिक गीतों का सम्मान जरूरी है, लेकिन छात्रों के समय और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।
केंद्र सरकार के कदम के बाद बढ़ी चर्चा
यह फैसला ऐसे समय आया है जब केंद्र सरकार भी राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर सख्त रुख अपना रही है। हाल ही में ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971’ में बदलाव को लेकर चर्चा हुई थी, जिसमें ‘वंदे मातरम’ के सम्मान को लेकर प्रावधान मजबूत करने की बात कही गई थी। इसके अलावा इस साल ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने को लेकर भी देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
कौन-कौन से गीत अब चर्चा में?
|
गीत |
स्थिति |
|
जन गण मन |
राष्ट्रगान, पहले से अनिवार्य |
|
वंदे मातरम |
नए आदेश के बाद अनिवार्य |
|
बांग्लार माटी बांग्लार जल |
पिछली सरकार के आदेश में अनिवार्य राज्य गीत |
स्कूल प्रमुखों की क्या चिंता है?
कुछ स्कूल प्रिंसिपलों का कहना है कि, छोटे बच्चों के लिए रोजाना तीन गीत गाना आसान नहीं होगा। उनका मानना है कि, लंबी प्रार्थना सभा की वजह से पढ़ाई का समय प्रभावित हो सकता है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि राज्य गीत को जारी रखा जाएगा या नहीं।
बंगाल की राजनीति में भी बढ़ी चर्चा
राज्य सरकार के इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। समर्थक इसे राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे स्कूलों पर अतिरिक्त दबाव मान रहे हैं। फिलहाल सभी स्कूलों को नए आदेश का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।











