हिजाब के बिना गाना पड़ा भारी!ईरानी सिंगर को 74 कोड़ों की सजा... कौन हैं परस्तू अहमदी जिनकी कहानी दुनिया भर में चर्चा में है?

तेहरान। ईरान की लोकप्रिय गायिका परस्तू अहमदी एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बन गई हैं। इस बार वजह उनका कोई नया गीत नहीं, बल्कि अदालत का वह फैसला है जिसने दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर खींचा है। ईरानी कोर्ट ने उन्हें बिना हिजाब ऑनलाइन प्रस्तुति देने के मामले में 74 कोड़ों की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उन पर दो साल तक देश से बाहर जाने और कला से जुड़ी गतिविधियों में भाग लेने पर भी रोक लगाई गई है। इस फैसले ने महिलाओं की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति के अधिकार को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
कौन हैं परस्तू अहमदी?
29 वर्षीय परस्तू अहमदी ईरान के माजंदरान प्रांत की रहने वाली हैं। उन्होंने फिल्म निर्देशन की पढ़ाई की और बाद में संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। परस्तू पारंपरिक ईरानी संगीत को आधुनिक अंदाज में पेश करने के लिए जानी जाती हैं। उनकी लोकप्रियता सिर्फ संगीत तक सीमित नहीं रही बल्कि सामाजिक मुद्दों पर खुलकर राय रखने के कारण भी वह अक्सर चर्चा में रही हैं।
महिलाओं के अधिकारों की मुखर आवाज
परस्तू अहमदी लंबे समय से महिलाओं की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति के अधिकार की समर्थक रही हैं। साल 2022 में ईरान में चले 'महिला, जीवन और आजादी' आंदोलन के दौरान भी उन्होंने खुलकर महिलाओं का समर्थन किया था। उनके गीतों और सार्वजनिक बयानों में अक्सर महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक स्वतंत्रता की बात दिखाई देती है। यही वजह है कि उनका नाम कई बार सरकारी नीतियों के विरोध से जुड़ता रहा है।
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ऑनलाइन कॉन्सर्ट बना विवाद की वजह
पूरा मामला दिसंबर 2024 में शुरू हुआ था। परस्तू ने एक ऐतिहासिक स्थान पर ऑनलाइन कॉन्सर्ट किया और उसे अपने यूट्यूब चैनल पर प्रसारित किया। इस प्रस्तुति के दौरान वह बिना हिजाब नजर आईं और उन्होंने स्लीवलेस ड्रेस पहन रखी थी। उनके साथ कई अन्य संगीतकार भी मौजूद थे। कॉन्सर्ट के दौरान उन्होंने एक प्रसिद्ध देशभक्ति गीत प्रस्तुत किया। वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो गया और लाखों लोगों ने इसे देखा। हालांकि ईरानी अधिकारियों ने इसे कानून का उल्लंघन मानते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी।
अदालत ने सुनाया सख्त फैसला
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने परस्तू अहमदी को 74 कोड़ों की सजा सुनाई। इसके अलावा उन पर दो साल तक विदेश यात्रा करने और किसी भी कलात्मक कार्यक्रम में भाग लेने पर प्रतिबंध लगाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने सार्वजनिक शालीनता और देश के हिजाब नियमों का उल्लंघन किया है।
दुनिया भर में हो रही आलोचना
अदालत के फैसले के बाद कई मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का कहना है कि यह फैसला महिलाओं की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति के अधिकार पर गंभीर सवाल खड़े करता है। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और कलाकारों ने भी इस सजा की आलोचना की है।
ईरान के कानून और महिलाओं पर पाबंदियां
ईरान में 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद महिलाओं के पहनावे और सार्वजनिक गतिविधियों को लेकर कई नियम बनाए गए थे। महिलाओं के लिए सार्वजनिक स्थानों पर हिजाब पहनना अनिवार्य माना जाता है। इसी तरह संगीत और मंचीय प्रस्तुतियों को लेकर भी कई सीमाएं लागू हैं। परस्तू अहमदी का मामला एक बार फिर इन नियमों और स्वतंत्रता के बीच चल रही बहस को सामने ले आया है।











