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सुप्रीम फैसला ;पश्चिम बंगाल SIR की लास्ट वोटर लिस्ट डेडलाइन एक हफ्ते आगे बढ़ी, SC का राज्य को साफ संदेश

EC की ओर से पेश हुए वकील नायडू ने यह भी दलील दी कि जिन अधिकारियों को उपलब्ध कराने की बात कही जा रही है, उनकी योग्यता को लेकर चुनाव आयोग के पास कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। ऐसे में यह तय करना मुश्किल है कि वे माइक्रो ऑब्जर्वर की जिम्मेदारी निभा पाएंगे या नहीं।
पश्चिम बंगाल SIR की लास्ट वोटर लिस्ट डेडलाइन एक हफ्ते आगे बढ़ी, SC का राज्य को साफ संदेश
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में एसआईआर (SIR) की अंतिम सूची के प्रकाशन की तारीख एक सप्ताह के लिए टाल दी गई है। यह सूची पहले 14 फरवरी को जारी होनी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने समयसीमा बढ़ाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने बड़ी संख्या में मतदाताओं से जुड़े दस्तावेजों की जांच अब भी लंबित होने और नए अधिकारियों की नियुक्ति को इसकी मुख्य वजह बताया है।

    4 फरवरी को ममता ने खुद रखी थी दलीलें

    इस मामले में 4 फरवरी को हुई सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद सुप्रीम कोर्ट में पेश हुई थीं। उस दिन उन्होंने आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग ने दूसरे राज्यों से अधिकारियों को लाकर माइक्रो ऑब्जर्वर नियुक्त कर दिया है, जिन्हें स्थानीय हालात की पर्याप्त समझ नहीं है। ममता बनर्जी ने यह भी कहा था कि छोटी-छोटी गलतियों के आधार पर बड़ी संख्या में लोगों को “तार्किक विसंगति” के नोटिस भेजे गए हैं। उनके मुताबिक, इससे एक करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटने का खतरा पैदा हो गया है।

    चुनाव आयोग- हम पूरी जिम्मेदारी के साथ काम कर रहे

    ममता बनर्जी के आरोपों पर चुनाव आयोग ने जवाब देते हुए कहा था कि वह पूरी जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ काम कर रहा है और किसी भी योग्य वोटर का नाम वोटर लिस्ट से हटने नहीं दिया जाएगा। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया था कि दूसरे राज्यों से अधिकारियों को माइक्रो ऑब्जर्वर इसलिए नियुक्त किया गया, क्योंकि पश्चिम बंगाल सरकार ने बार-बार अनुरोध के बावजूद आवश्यक संख्या में अधिकारी उपलब्ध नहीं कराए। इस पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि राज्य सरकार अधिकारियों को उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह तैयार है।

    आज की सुनवाई पर एक नजर

    सोमवार, 9 फरवरी को हुई सुनवाई में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं पेश नहीं हुईं, लेकिन उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार चुनाव आयोग को 8,505 अधिकारी उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। वहीं, चुनाव आयोग की तरफ से पेश हुए वकील डी. शेषाद्री नायडू ने कोर्ट को बताया कि आयोग का काम अब काफी हद तक आगे बढ़ चुका है और जो नए अधिकारी दिए जा रहे हैं, उन्हें प्रशिक्षण देने में अतिरिक्त समय लगेगा।

    EC के वकील बोले- अधिकारियों की योग्यता की कोई जानकारी नहीं

    आगे नायडू ने यह भी दलील दी कि जिन अधिकारियों को उपलब्ध कराने की बात कही जा रही है, उनकी योग्यता को लेकर चुनाव आयोग के पास कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। ऐसे में यह तय करना मुश्किल है कि वे माइक्रो ऑब्जर्वर की जिम्मेदारी निभा पाएंगे या नहीं। उन्होंने कहा कि माइक्रो ऑब्जर्वर का कार्य बेहद संवेदनशील होता है। वे दस्तावेजों की बारीकी से निगरानी करते हैं और ईआरओ यानी जिला निर्वाचन अधिकारी को आवश्यक सुझाव देते हैं।

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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