नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को असम का एक अहम मुद्दा पहुंचा है। दरअसल सीएम हिमंता बिस्वा सरमा पर जनहित याचिका दायर की गई है। यह मामला शूटिंग वीडियो से जुड़ा है। ओवैसी की एक्स पोस्ट के अनुसार, इसमें कहा गया कि सीएम हिमंता सरमा ने शूटिंग वीडियो में मुसलमानों को टारगेट गोली चलाने का वीडियो दिखाने के लिए बनाया था।
दूसरी ओर हाल ही में अपने भाषण में मुसलमानों को लेकर बयान दिया था। जिसमें उन्होंने खासकर के राज्य के परिदृश्य के हिसाब से इसके बारे में बात की थी। याचिका में उन पर नफरत फैलाने वाले और गैर-जिम्मेदाराना बयान देने के आरोप लगाए गए हैं।
याचिकाकर्ताओं ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा सहित अन्य वरिष्ठ मंत्रियों और राज्यपालों के कथित मुस्लिम-विरोधी बयानों का हवाला दिया है। याचिका में इन बयानों को उच्च पदों पर बैठे व्यक्तियों द्वारा अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों के उल्लंघन का उदाहरण बताया गया है।
इस जनहित याचिका में पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, सामाजिक कार्यकर्ता रूप रेखा वर्मा और जॉन दयाल सहित कुल 12 याचिकाकर्ता शामिल हैं। सभी ने अदालत से इस गंभीर मसले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, कुछ वरिष्ठ मंत्री और राज्यपाल लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं, जिनमें मुस्लिम समुदाय को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है।
इस बीच हैदराबाद से सांसद और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि दुर्भाग्य से नरसंहार जैसे शब्दों वाले नफरती भाषण देना अब सामान्य होता जा रहा है। उन्होंने ऐसे बयानों को गंभीर और समाज के लिए खतरनाक बताया।
कांग्रेस ने उस वीडियो की कड़ी निंदा करते हुए उसे “बेहद आपत्तिजनक और विचलित करने वाला” करार दिया है। पार्टी ने इस दलील को सिरे से खारिज किया कि इसे महज ट्रोल कंटेंट बताकर नजरअंदाज किया जाए। कांग्रेस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह वीडियो बीजेपी के असम स्थित आधिकारिक हैंडल से पोस्ट किया गया था, जिसमें अल्पसंख्यकों की हत्या का महिमामंडन होता दिखाई देता है। पार्टी के मुताबिक, ऐसा कंटेंट सामूहिक हिंसा और नरसंहार के लिए उकसाने जैसा है। कांग्रेस ने इस पूरे मामले में न्यायपालिका से हस्तक्षेप करने की मांग भी की है।