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गरीबों का हक लूटा… बाजार में बेचा अनाज :PDS घोटाले पर ED का बड़ा एक्शन, 9 ठिकानों पर छापेमारी

पश्चिम बंगाल में PDS राशन घोटाले में ED ने बड़ा एक्शन लेते हुए 9 ठिकानों पर छापेमारी की है। जांच में गेहूं और चावल की हेराफेरी, बोरियां बदलकर खुले बाजार में बिक्री और करोड़ों की काली कमाई का खुलासा हुआ है। मनी लॉन्ड्रिंग एंगल की भी जांच जारी है।
PDS घोटाले पर ED का बड़ा एक्शन, 9 ठिकानों पर छापेमारी

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) घोटाले में बड़ा एक्शन लिया है। एजेंसी की कोलकाता जोनल यूनिट ने कोलकाता, बर्धमान और हाबड़ा समेत 9 ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई ऐसे समय पर हुई है जब राज्य में चुनावी माहौल गरम है, जिससे इस केस की राजनीतिक और प्रशासनिक अहमियत और बढ़ गई है। ED का फोकस उन लोगों पर है, जिन्होंने गरीबों के लिए आने वाले राशन को बाजार में बेचकर भारी मुनाफा कमाया।

क्या है PDS घोटाले का पूरा मामला

यह मामला सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी PDS से जुड़ा है, जिसके तहत सरकार गरीबों और जरूरतमंदों को सस्ती दर पर अनाज उपलब्ध कराती है। आरोप है कि, इस योजना के तहत आने वाले गेहूं और चावल को बड़े पैमाने पर हेराफेरी कर खुले बाजार में बेचा गया। इस पूरे मामले की शुरुआत साल 2020 में हुई, जब बसीरहाट पुलिस स्टेशन में एक एफआईआर दर्ज की गई थी। यह शिकायत घोजाडांगा लैंड कस्टम्स स्टेशन के डिप्टी कमिश्नर ने की थी, जिसमें कहा गया था कि, सरकारी अनाज को अवैध तरीके से दूसरी जगह भेजा जा रहा है।

कैसे शुरू हुई ED की जांच

पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर ED ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया और जांच शुरू की। एजेंसी को शुरुआती जांच में ही यह संकेत मिल गए थे कि, यह सिर्फ अनाज की हेराफेरी का मामला नहीं, बल्कि इसके जरिए बड़े स्तर पर काले धन का खेल भी चल रहा है। इसी के चलते अब PMLA (धन शोधन निवारण अधिनियम) के तहत कार्रवाई की जा रही है।

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किन-किन जगहों पर चल हुई छापेमारी

ED ने एक साथ 9 ठिकानों पर छापेमारी की है, जिनमें सप्लायर्स, एक्सपोर्टर्स और कारोबारियों के ठिकाने शामिल हैं। ये सभी लोग इस कथित घोटाले के नेटवर्क का हिस्सा बताए जा रहे हैं। छापेमारी जिन जगहों पर हुई उनमें हाबरा, बर्धमान और कोलकाता के प्रमुख कारोबारी इलाके शामिल हैं। सागर एंटरप्राइजेज, आदर्श इंटरनेशनल, मां अन्नपूर्णा राइस कंसर्न, साइनैक्स अन्नपूर्णा उद्योग प्राइवेट लिमिटेड जैसे नाम सामने आए हैं। इसके अलावा सुशांतो साहा, पार्थ साहा, समीर कुमार चंद्रा, दौलत राम गुप्ता और कंचन सोम जैसे कारोबारियों के ठिकानों पर भी तलाशी चल रही है।

ऐसे किया गया गरीबों के राशन में खेल

ED की जांच में सामने आया है कि, आरोपियों ने सरकारी अनाज की हेराफेरी के लिए एक सुनियोजित सिस्टम बनाया था। सप्लायर्स, लाइसेंसधारी डीलरों और बिचौलियों की मिलीभगत से गरीबों के लिए आने वाला गेहूं और चावल सस्ते दामों पर खरीद लिया जाता था। इसके बाद इसे आधिकारिक सप्लाई चेन से हटाकर अलग-अलग जगहों पर जमा किया जाता था।

सबसे अहम हिस्सा था अनाज की पहचान छिपाना। इसके लिए भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राज्य सरकार के निशान वाले जूट के बोरों को हटा दिया जाता था या उन्हें उलट दिया जाता था। फिर उसी अनाज को नए बोरों में भरकर वैध स्टॉक के रूप में पेश किया जाता था। इसके बाद इसे खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेचा जाता था या विदेशों में निर्यात किया जाता था।

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गेहूं के साथ चावल में भी हेराफेरी

जांच में यह भी सामने आया है कि यह घोटाला सिर्फ गेहूं तक सीमित नहीं था। चावल के कारोबार में भी इसी तरह की हेराफेरी की गई। हाबड़ा इलाके में जिन व्यापारियों के यहां छापेमारी हुई है, वे चावल कारोबारी बताए जा रहे हैं। इससे पता चलता है कि, यह पूरा नेटवर्क कई तरह के खाद्यान्नों में गड़बड़ी कर रहा था।

मनी लॉन्ड्रिंग और काली कमाई का एंगल

ED को इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का मजबूत एंगल नजर आ रहा है। एजेंसी को शक है कि इस अवैध कारोबार से करोड़ों रुपए की कमाई की गई और फिर उसे अलग-अलग तरीकों से वैध दिखाने की कोशिश की गई। जांच में निरंजन चंद्र साहा और उनके सहयोगियों की भूमिका भी सामने आई है, जिन पर इस नेटवर्क को चलाने का आरोप है।

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क्या तलाश रही है ED

छापेमारी के दौरान ED की टीमें कई अहम सबूत जुटाने में लगी हैं। इसमें दस्तावेज, डिजिटल डेटा, बैंक लेन-देन के रिकॉर्ड और संपत्तियों से जुड़े कागजात शामिल हैं। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि, इस घोटाले से कितनी कमाई हुई और पैसा किन-किन रास्तों से ट्रांसफर किया गया।

Manisha Dhanwani
By Manisha Dhanwani

मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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