चुनाव डेस्क। असम, केरल और पुड्डुचेरी में मतदान के लिए कुछ घंटे बाकी रह गए हैं। ऐसे में सत्ताधारी दलों को अपनी सरकार बचाने और विरोधी सत्ता में वापस आने के लिए मतदाताओं से सहयोग की उम्मीद कर रहे हैं। तीनों राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में मतदान शांतिपूर्ण और निष्पक्ष कराने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। अब सभी दलों की नजर मतदाताओं पर टिकी है, जिनका फैसला आने वाले समय की राजनीति तय करेगा।आइए समझते हैं तीनों राज्यों में राजनीतिक स्थिति और चुनावी समीकरण।
असम की 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए 9 अप्रैल को मतदान होगा, जिसमें कुल 722 उम्मीदवार मैदान में हैं। राज्य में मुख्य मुकाबला भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन के बीच माना जा रहा है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करने का लक्ष्य लेकर मैदान में है, जबकि कांग्रेस 2016 में सत्ता गंवाने के बाद वापसी की कोशिश कर रही है।
असम में भाजपा 90 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि सहयोगी असम गण परिषद (अगप) 26 और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट 11 सीटों पर मैदान में हैं। कांग्रेस ने 99 उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि एआईयूडीएफ 30 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। अन्य दलों और निर्दलीयों ने भी कई सीटों पर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। राज्य में लगभग 2.50 करोड़ मतदाता मतदान के पात्र हैं। कई सीटों पर कड़े मुकाबले की उम्मीद है, जिसमें मुख्यमंत्री की जालुकबाड़ी सीट भी शामिल है। चुनाव आयोग ने सभी मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।
केरल की 140 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होगा। राज्य में कुल 883 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं, जिनकी किस्मत का फैसला 2.71 करोड़ मतदाता करेंगे। केरल में मुख्य मुकाबला सत्ताधारी वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF), कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) और भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के बीच है।
चुनाव प्रचार के दौरान गोल्ड स्मगलिंग केस, सबरीमाला मुद्दा और विकास जैसे विषय प्रमुख रहे। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने LDF के प्रचार की अगुवाई की, जबकि कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने प्रचार किया। भाजपा ने भी राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए व्यापक अभियान चलाया। परंपरागत रूप से LDF और UDF के बीच सत्ता बदलती रही है, लेकिन इस बार NDA भी तीसरे विकल्प के रूप में अपनी उपस्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। राज्य में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक है, जो चुनावी परिणाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
केंद्र शासित प्रदेश पुड्डुचेरी की 30 सदस्यीय विधानसभा के लिए भी 9 अप्रैल को मतदान होगा। चुनाव मैदान में कुल 294 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। यहां मुख्य मुकाबला भाजपा समर्थित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन के बीच माना जा रहा है। एनडीए गठबंधन में ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस (AINRC) 16 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि भाजपा ने 10 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। अन्य सहयोगी दल AIADMK और IJKने 2-2 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। दूसरी ओर इंडिया गठबंधन में कांग्रेस 16 सीटों पर और द्रमुक 13 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि VCK एक सीट पर मैदान में है। इसके अलावा नवगठित पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम ने भी अधिकांश सीटों पर उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को रोचक बना दिया है। मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए प्रशासन ने जागरूकता अभियान भी चलाए हैं।