इंदौर में एससी-एसटी छात्रावासों में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे सैकड़ों छात्रों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। जनजातीय कार्य विभाग के 15 मई से पहले हॉस्टल खाली करने के आदेश ने छात्रों की पढ़ाई और भविष्य दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। JEE, NEET UG, CUET जैसी अहम प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र अब किताबों से ज्यादा सिर छुपाने की चिंता में डूबे हैं। छात्रों का साफ कहना है—“दो-तीन महीने के लिए हम कहां जाएं, पढ़ाई कैसे जारी रखें?”
पीजी या कमरा लेकर रहना उनके लिए आसान
मोरोद और भंवरकुआं के छात्रावासों में रहने वाले कई छात्र आर्थिक रूप से कमजोर आदिवासी परिवारों से आते हैं। ऐसे में प्राइवेट पीजी या कमरा लेकर रहना उनके लिए आसान नहीं है। इंदौर में 5 से 7 हजार रुपए महीने का किराया और खाने-पीने का खर्च उठाना कई परिवारों की क्षमता से बाहर है। छात्रों का आरोप है कि ऐसे वक्त में, जब उनकी जिंदगी की सबसे अहम परीक्षाएं सामने हैं, तब हॉस्टल खाली कराने का आदेश उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ जैसा है।
परीक्षा के बीच उन्हें बेघर करने का आदेश
छात्रों का कहना है कि सरकार एक तरफ शिक्षा और अवसर की बात करती है, दूसरी तरफ परीक्षा के बीच उन्हें बेघर करने जैसे आदेश जारी किए जा रहे हैं। छात्रों ने मांग की है कि जिन विद्यार्थियों की प्रवेश परीक्षाएं मई-जून में हैं, उन्हें बिना शर्त छात्रावास में रहने दिया जाए। हालांकि विभाग ने कहा है कि एडमिट कार्ड और कोचिंग प्रमाण पत्र के आधार पर विशेष अनुमति दी जा सकती है, लेकिन छात्र इसे राहत नहीं, अस्थायी और जटिल प्रक्रिया मान रहे हैं।
विभाग का तर्क है कि मई-जून में हॉस्टल में पुताई, मरम्मत और सफाई कार्य होना है और 15 जून से नए सत्र के प्रवेश शुरू होंगे। लेकिन छात्रों का सवाल है कि मेंटेनेंस के नाम पर क्या मौजूदा विद्यार्थियों की तैयारी दांव पर लगाई जा सकती है? फिलहाल इस आदेश को लेकर छात्रों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और इसे लेकर विरोध के स्वर भी तेज होने लगे हैं। नरेंद्र भिड़े, सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग, इंदौर