इंदौर। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के नाम पर कथित फर्जी सिफारिशी पत्र दिखाकर नौकरी हासिल करने के मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी को दोषमुक्त कर दिया है। अपर सत्र न्यायाधीश विवेक कुमार चंदेल की अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य न होने के चलते आरोपी दीपक अवस्थी को बरी कर दिया। इस फैसले के बाद पूरे मामले में पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मामला 13 अक्टूबर 2023 का है, जब फरियादी राहुल पिस्तौर ने क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि झांसी निवासी दीपक अवस्थी ने विजय नगर स्थित अवंतिका गैस एजेंसी में असिस्टेंट मैनेजर (प्रोजेक्ट) पद के लिए आवेदन करते समय प्रधानमंत्री कार्यालय, नई दिल्ली के कथित डायरेक्टर के नाम से जारी सिफारिशी पत्र प्रस्तुत किया।
शिकायत में यह भी सामने आया कि आरोपी पुलिस की वर्दी पहनकर खुद को पुलिसकर्मी बताता हुआ एजेंसी कार्यालय पहुंचा था। उसने पीएमओ से जारी एक प्रशंसा पत्र को एडिट कर उसे नौकरी के लिए सिफारिशी पत्र के रूप में पेश किया, जिससे मामला और संदिग्ध हो गया।
मामला सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया था। जांच के दौरान मोबाइल फोन और कई दस्तावेज भी जब्त किए गए थे।
हालांकि कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष अपने आरोपों को साबित नहीं कर पाया। जब्ती प्रक्रिया, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और अन्य तथ्यों में कई विरोधाभास सामने आए, जिससे केस कमजोर पड़ गया। अंततः अदालत ने सबूतों के अभाव में आरोपी को बरी कर दिया।