कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कोलकाता में हुई आयकर विभाग की कार्रवाई ने सियासी हलचल तेज कर दी है। शुक्रवार सुबह TMC विधायक देबाशीष कुमार के घर और दफ्तर पर छापेमारी की गई, जिससे चुनावी माहौल अचानक गरमा गया। पहले से ED जांच का सामना कर रहे कुमार अब IT रेड के बाद विपक्ष के निशाने पर हैं, वहीं TMC इसे साजिश बता रही है।
शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे आयकर विभाग की टीम ने दक्षिण कोलकाता के मनोहरपुकुर रोड स्थित TMC विधायक देबाशीष कुमार के घर पर छापा मारा। इसी के साथ उनके चुनावी कार्यालय और मोतीलाल नेहरू रोड स्थित पार्टी ऑफिस पर भी एक साथ कार्रवाई की गई। छापेमारी के दौरान केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई, ताकि किसी तरह की गड़बड़ी को रोका जा सके। उस समय देबाशीष कुमार अपने घर पर ही मौजूद थे और अधिकारियों ने कई घंटों तक दस्तावेजों की जांच की।
आयकर विभाग की इस कार्रवाई की आधिकारिक वजह तुरंत स्पष्ट नहीं की गई, लेकिन जानकारी के मुताबिक यह जांच वित्तीय लेन-देन से जुड़ी हो सकती है। देबाशीष कुमार पहले से ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के दायरे में हैं। उन्हें इसी महीने 1, 3 और 9 अप्रैल को पूछताछ के लिए बुलाया गया था, जहां वे पेश भी हुए थे। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि, उनका कारोबारी अमित गांगोपाध्याय के साथ किसी तरह का लेन-देन हुआ है या नहीं। गांगोपाध्याय के ठिकानों पर भी हाल ही में छापेमारी हो चुकी है।
यह पूरी कार्रवाई ऐसे समय पर हुई है जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का माहौल बना हुआ है। देबाशीष कुमार दक्षिण कोलकाता की राशबेहारी सीट से उम्मीदवार हैं, जहां 29 अप्रैल को मतदान होना है। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले इस तरह की छापेमारी ने राजनीतिक माहौल को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है। इस कार्रवाई का असर चुनावी माहौल और मतदाताओं की सोच पर पड़ सकता है।
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छापेमारी की खबर सामने आते ही TMC कार्यकर्ता बड़ी संख्या में पार्टी कार्यालय के बाहर जमा हो गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। समर्थकों ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने बिना सूचना दिए कार्यालय का ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया और वहां रखे चुनाव से जुड़े अहम दस्तावेजों की जांच की। कुछ कार्यकर्ताओं का यह भी दावा है कि, जरूरी फाइलों की कॉपी की गई है। उनका कहना है कि, यह कार्रवाई एक साजिश के तहत की गई है, ताकि विपक्ष को चुनाव में फायदा पहुंचाया जा सके।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की एजेंसियों का इस्तेमाल चुनाव के समय राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। वहीं बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जांच एजेंसियां अपना काम स्वतंत्र रूप से कर रही हैं और इसमें राजनीति नहीं है। दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप से माहौल और गरमा गया है।
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राज्य |
सीटें |
फेज |
वोटिंग |
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पश्चिम बंगाल |
294 |
2 |
23 और 29 अप्रैल |
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तमिलनाडु |
234 |
1 |
23 अप्रैल |
|
असम |
126 |
1 |
हो चुकी |
|
केरल |
140 |
1 |
हो चुकी |
|
पुडुचेरी |
30 |
1 |
हो चुकी |
रिजल्ट: 4 मई
पूरी चुनाव प्रक्रिया: 51 दिन
इस छापेमारी से एक दिन पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक रैली में आशंका जताई थी कि, चुनाव के दौरान उनके नेताओं को निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा था कि कुछ लोगों की गिरफ्तारी की योजना बनाई जा रही है। अब छापेमारी के बाद TMC इस बयान को सही ठहराते हुए इसे राजनीतिक कार्रवाई बता रही है। इससे यह मुद्दा और ज्यादा संवेदनशील हो गया है।
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इसी बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान बयान दिया, जिससे विवाद और बढ़ गया। उन्होंने बांग्लादेशी घुसपैठ को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार पर निशाना साधा और कहा कि असम में घुसपैठ पर रोक लगा दी गई है, जबकि बंगाल में इसे बढ़ावा दिया जा रहा है। इस बयान ने चुनावी माहौल को और ज्यादा गरमा दिया है।
राशबेहारी विधानसभा सीट इस समय खास चर्चा में है क्योंकि यहां मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है। एक तरफ TMC के देबाशीष कुमार हैं, तो दूसरी तरफ बीजेपी ने स्वपन दासगुप्ता को मैदान में उतारा है। छापेमारी के बाद इस सीट पर राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गई हैं और यह मुकाबला हाई-प्रोफाइल बन गया है।