मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव अब और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद तीखा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया है कि, अमेरिका ईरान के शासन को सैन्य, आर्थिक और अन्य सभी तरीकों से कमजोर कर रहा है और आने वाले समय में हालात और गंभीर हो सकते हैं।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि, ईरान के खिलाफ चल रहा अभियान उसे पूरी तरह तबाह कर देगा। उन्होंने यहां तक कहा कि दुनिया देखेगी कि आज इन लोगों का क्या हश्र होता है। डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि, ईरान की सरकार से जुड़े लोगों को मारना उनके लिए 'बहुत बड़ा सम्मान' है। इस बयान के बाद मिडिल ईस्ट में पहले से जारी जंग और तनाव और बढ़ गया है।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पोस्ट में दावा किया कि अमेरिका ईरान के आतंकवादी शासन को हर मोर्चे पर खत्म कर रहा है। उन्होंने कहा कि,
ट्रंप ने यह भी कहा कि, अमेरिका के पास असीमित गोला-बारूद और बेजोड़ सैन्य क्षमता है और वह इस अभियान को जारी रखेगा।
अपने बयान में ट्रंप ने ईरान पर गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि ईरान पिछले 47 वर्षों से दुनिया भर में निर्दोष लोगों को निशाना बनाता रहा है। ट्रंप ने लिखा कि, अब वह अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में ईरान के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं और इसे अपने लिए बड़ा सम्मान मानते हैं।

अपने पोस्ट में ट्रंप ने एक मशहूर अमेरिकी अखबार की भी आलोचना की। उन्होंने लिखा कि, अगर कोई यह अखबार पढ़े तो उसे लगेगा कि अमेरिका इस जंग में जीत नहीं रहा है, जबकि हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। ट्रंप के इस बयान ने अमेरिकी मीडिया और राजनीतिक हलकों में भी बहस छेड़ दी है।
अमेरिका-ईरान और इजराइल के बीच चल रहा संघर्ष अब 14वें दिन में प्रवेश कर चुका है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने हाल ही में वीडियो जारी कर ईरान के नौसैनिक ठिकानों पर हमले के फुटेज भी दिखाए हैं। इन हमलों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास मौजूद जहाजों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि, यह जंग अमेरिका ने शुरू नहीं की, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में इसे खत्म जरूर किया जाएगा।
मीडिया रिपोर्ट्स और सैन्य सूत्रों के अनुसार इस जंग के दौरान ईरान की शीर्ष लीडरशिप को भारी नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट्स में जिन नामों का जिक्र किया गया है उनमें शामिल हैं-
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि पूरी तरह नहीं हो पाई है, लेकिन यह साफ है कि इस संघर्ष में ईरान की राजनीतिक और सैन्य व्यवस्था पर बड़ा दबाव पड़ा है।
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कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि, ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई गंभीर रूप से घायल हैं। ब्रिटिश मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, हमले में घायल होने के बाद उन्हें तेहरान के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि, हमले में उनके शरीर को गंभीर चोटें आईं और एक पैर तक काटना पड़ा। हालांकि, ईरान की ओर से इन दावों की पुष्टि नहीं की गई है।
इजराइल ने भी दावा किया है कि, उसके फाइटर जेट्स ने ईरान के 200 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया है। इन हमलों में कई सैन्य ठिकानों, रडार सिस्टम और मिसाइल लॉन्च साइट्स को नुकसान पहुंचने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन हमलों के बाद इजराइल के कुछ हिस्सों में भी जवाबी हमले हुए, जिनमें कुछ इमारतों को नुकसान पहुंचा और कुछ लोग घायल हुए।
इस युद्ध का सबसे बड़ा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। दुनिया के सबसे अहम समुद्री तेल मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट पर जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है। यह रास्ता मिडिल ईस्ट से दुनिया के कई देशों तक तेल पहुंचाने का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। इस मार्ग के प्रभावित होने से कई देशों में ईंधन संकट का खतरा बढ़ गया है।
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हालात को देखते हुए कई देशों ने अपने रणनीतिक तेल भंडार का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। कुछ देशों के कदम-
अमेरिका
अमेरिका ने कुछ देशों को 30 दिन तक रूस से तेल खरीदने की छूट दी है।
भारत
भारत ने आपातकालीन कदम उठाते हुए उद्योगों को मिलने वाले ईंधन में कटौती की है ताकि घरेलू सप्लाई प्रभावित न हो।
पाकिस्तान
ईंधन बचाने के लिए स्कूल बंद करने और वर्क फ्रॉम होम जैसे कदम उठाए गए हैं।
बांग्लादेश
पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर सीमा तय की गई है और लोगों से बिजली बचाने की अपील की गई है।
ऑस्ट्रेलिया
सरकार अपने रिजर्व से 762 मिलियन लीटर ईंधन बाजार में उतार रही है।
जापान
जापान ने लगभग 80 मिलियन बैरल तेल रिजर्व से निकालने का फैसला किया है।
दक्षिण कोरिया
तेल की कीमतों पर ऊपरी सीमा तय कर दी गई है।
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ऊर्जा बाजार के जानकारों का कहना है कि, अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स के अनुसार मार्च महीने में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रह सकती है। इसका सीधा असर दुनिया भर में महंगाई और ईंधन की कीमतों पर पड़ सकता है।
इस बीच ग्रीस में पुलिस ने एक व्यक्ति को जासूसी के शक में गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि, वह अमेरिकी सैन्य बेस के आसपास जहाजों की तस्वीरें ले रहा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल ही में दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर USS जेराल्ड आर. फोर्ड इसी इलाके से होकर गुजरा था।