रमजान में ईरान पर हमले की तैयारी!अमेरिका ने बढ़ाई सैन्य ताकत; कई हफ्तों तक चलेगा सैन्य अभियान

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तेजी से बढ़ रहा है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में सैन्य तैयारियां तेज कर दी गई हैं। ईरान पर संभावित हमले और लंबे सैन्य अभियान की आशंका के बीच कूटनीतिक बातचीत जारी है।
अमेरिका ने बढ़ाई सैन्य ताकत; कई हफ्तों तक चलेगा सैन्य अभियान
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। पिछले कुछ दिनों में जिस तरह से अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य ताकत बढ़ाई है, उससे बड़े सैन्य टकराव की आशंका जताई जा रही है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि, अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई के विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहा है। हालांकि, अब तक किसी हमले को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

    यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब मुस्लिम देशों में रमजान का पवित्र महीना शुरू हो चुका है और मिडिल ईस्ट पहले से ही कई संघर्षों से गुजर रहा है।

    अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट्स में क्या कहा गया

    एक अमेरिकी समाचार चैनल ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर ब्रीफिंग दी गई है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि, अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ कार्रवाई के लिए तैयार है और जरूरत पड़ने पर तुरंत ऑपरेशन शुरू किया जा सकता है। हालांकि, सूत्रों ने यह भी साफ किया है कि ट्रंप ने अभी तक हमले को मंजूरी नहीं दी है और अंतिम फैसला बाकी है।

    मिडिल ईस्ट में बढ़ी अमेरिकी सैन्य मौजूदगी

    पिछले कुछ हफ्तों में अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य तैनाती बढ़ा दी है। इसमें एयरक्राफ्ट कैरियर, युद्धपोत, लड़ाकू विमान और एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं।  रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका का सबसे आधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर USS Gerald R. Ford भी जल्द ही क्षेत्र में पहुंच सकता है। इसके अलावा बड़ी संख्या में फाइटर जेट्स और अतिरिक्त सैनिक पहले से ही तैनात किए जा चुके हैं।

    ओपन-सोर्स ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, 150 से अधिक सैन्य कार्गो विमान हथियार और गोला-बारूद लेकर मिडिल ईस्ट पहुंच चुके हैं। इसके साथ ही 50 से ज्यादा लड़ाकू विमान, जिनमें F-35, F-22 और F-16 शामिल हैं, क्षेत्र की ओर रवाना किए गए हैं।

    रक्षा मामलों के जानकार मानते हैं कि, इतनी बड़ी सैन्य तैयारी किसी छोटे ऑपरेशन के लिए नहीं होती, बल्कि यह लंबे और बड़े अभियान की ओर इशारा करती है।

    क्यों अलर्ट मोड में है पेंटागन

    अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन को आशंका है कि, अगर ईरान पर हमला हुआ, तो वह जवाबी कार्रवाई जरूर करेगा। इसी वजह से कुछ अमेरिकी कर्मियों को अस्थायी रूप से मिडिल ईस्ट से हटाने की तैयारी की जा रही है।

    इस कदम को एहतियात के तौर पर देखा जा रहा है, ताकि किसी संभावित हमले या जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी नागरिकों और कर्मियों को नुकसान न पहुंचे।

    परमाणु समझौते पर बातचीत जारी

    तनाव के बीच यह भी सच है कि, अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई है। जिनेवा में दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत चल रही है, जिसमें ओमान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।

    अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर सख्त पाबंदियां माने। वहीं, ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है और वह अपनी रक्षा से जुड़े मुद्दों, खासकर बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर कोई समझौता नहीं करेगा।

    युद्ध की आशंका ज्यादा

    एक अमेरिकी न्यूज वेबसाइट Axios की एक रिपोर्ट ने इस पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि, अगर अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई की, तो वह सीमित नहीं होगी, बल्कि कई हफ्तों तक चलने वाला बड़ा अभियान हो सकता है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आने वाले हफ्तों में सैन्य कार्रवाई की संभावना 90 प्रतिशत तक बताई है। हालांकि, यह भी कहा गया है कि प्रशासन के भीतर इस मुद्दे पर एक राय नहीं है।

    क्यों बढ़ी इजरायल की चिंता

    इस पूरे तनाव पर इजरायल भी करीबी नजर बनाए हुए है। इजरायल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपने लिए बड़ा खतरा मानता रहा है। इजरायली सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि, अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है, तो ईरान इजरायल को भी निशाना बना सकता है। इसी वजह से इजरायल ने भी अपनी सुरक्षा तैयारियां बढ़ा दी हैं।

    अगर युद्ध हुआ तो क्या असर पड़ेगा

    अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध का असर सिर्फ इन दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका सीधा असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। सबसे बड़ा खतरा होरमुज जलडमरूमध्य को लेकर है, जहां से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल गुजरता है। अगर यह रास्ता प्रभावित हुआ, तो तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।

    ईरान की प्रतिक्रिया

    ईरान ने साफ कर दिया है कि, अगर उस पर हमला हुआ, तो वह चुप नहीं बैठेगा। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि देश अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा। ईरान ने हाल के दिनों में अपनी सैन्य गतिविधियां तेज की हैं और क्षेत्र में सैन्य अभ्यास भी बढ़ाए हैं।

    क्या यह दबाव बनाने की रणनीति है?

    विशेषज्ञों का मानना है कि, अमेरिका की यह सैन्य तैयारी ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकती है, ताकि वह परमाणु समझौते पर झुक जाए। हालांकि, मौजूदा हालात में जोखिम काफी बढ़ गया है। एक छोटी सी चूक भी बड़े युद्ध में बदल सकती है।

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

    Latest Posts