आज के समय में ब्रेन हेमरेज एक वैश्विक स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। इसकी सही जानकारी न होने के कारण कई बार समय पर इलाज नहीं हो पाता और परिणाम बहुत गंभीर हो सकते हैं। लोगों के मन में अक्सर सवाल होते हैं- ब्रेन हेमरेज क्या है, कैसे होता है, क्यों होता है और इसके लक्षण क्या हैं। इसी उद्देश्य से यह लेख सरल भाषा में तैयार किया गया है।
जब दिमाग की किसी नस के फटने से खून बाहर रिसने लगता है और दिमाग के अंदर दबाव बढ़ जाता है, तो इस स्थिति को ब्रेन हेमरेज कहते हैं। इससे मस्तिष्क को ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और दिमाग की कोशिकाएं प्रभावित होने लगती हैं। मेडिकल भाषा में इसे इंट्राक्रेनियल हेमरेज या ब्रेन ब्लीडिंग भी कहा जाता है।
सीधे शब्दों में कहें तो ब्रेन हेमरेज का मतलब है- दिमाग के अंदर खून का रिसाव होना। यह एक प्रकार का स्ट्रोक होता है, जो नस फटने के कारण होता है और जानलेवा साबित हो सकता है।
जब किसी कारण से दिमाग की नस फट जाती है, तो खून बाहर फैलने लगता है। इससे दिमाग में दबाव बढ़ता है और ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित हो जाती है। यही स्थिति ब्रेन हेमरेज को जन्म देती है।
ब्रेन हेमरेज के मुख्य कारण इस प्रकार हैं-
ब्रेन हेमरेज के लक्षण कई बार अन्य बीमारियों जैसे लगते हैं, इसलिए पहचान मुश्किल हो सकती है। आम लक्षण इस प्रकार हैं-
ब्रेन हेमरेज के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे-
ब्रेन हेमरेज से ठीक होने में कम से कम 3 सप्ताह से लेकर कई महीने तक लग सकते हैं। यह बीमारी की गंभीरता, इलाज और मरीज की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है। कई मामलों में लंबा इलाज और धैर्य की जरूरत होती है।
जीवित रहने की संभावना कई बातों पर निर्भर करती है- जैसे हेमरेज की जगह, इलाज कितनी जल्दी शुरू हुआ और मरीज की उम्र। कई मामलों में खतरा अधिक होता है, इसलिए समय पर इलाज बेहद जरूरी है।
ब्रेन हेमरेज का इलाज दो तरीकों से किया जाता है-
जब दिमाग में ज्यादा दबाव हो या खून जमा हो गया हो, तो ऑपरेशन किया जाता है। यह अधिकतर युवाओं में किया जाता है।
बुजुर्गों या संवेदनशील मामलों में दवाओं से इलाज किया जाता है। इसमें ब्लड प्रेशर कंट्रोल, दिमाग का दबाव कम करना और खून जमने की प्रक्रिया को संतुलित करना शामिल है।
ब्रेन हेमरेज एक गंभीर लेकिन समय पर पहचानी जाने वाली बीमारी है। सही जानकारी, जागरूकता और तुरंत इलाज से कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करना ही सबसे बड़ा बचाव है।