नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग का आज 12वें दिन है। दोनों ओर से लगातार एक दूसरे पर हमले किए जा रहे हैं। जबकि दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए ड्रोन धमाके में चार विदेशी नागरिक घायल बताए जा रहे हैं। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारिजानी का कहना है कि ईरान के लोग अमेरिका की धमकियों से नहीं डरते हैं। उन्होंने कहा कि पहले भी कई ताकतवर लोग ईरान को खत्म करने की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन वे सफल नहीं हुए। इस बीच अमेरिका का कहना है कि आज रात ईरान पर सबसे बड़ा हमला होगा।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान की नौसेना, वायुसेना और ड्रोन क्षमता को भारी नुकसान हुआ है और उसका सैन्य ढांचा काफी हद तक कमजोर पड़ चुका है।
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हर बीतते दिन के साथ मिडिल ईस्ट की जंग घातक होती जा रही है। अब यह बात सामने आई है कि इजरायल पर हमला करने के लिण् ईरान क्लस्टर हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है। इजरायल का कहना है क ईरान पहले ही दिन से उसके उपर क्लस्टर हथियार दाग रहा है। ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर (इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग) ने भी इस हमले का एक वीडियो जारी किया है जिसमें दिख रहा है कि कैसे इजरायल के आसमान में बहुत उपर जाकर यह कलस्ट बम फटता है और उसके अंदर से दर्जनों छोटे बम निकलते हैँ। यह छोटे बम एक बड़े क्षेत्र में बिखर जाते हैं और तबाही मचाते हैं। ये छोटे बम रात में आसमान में आग के गोले जैसे दिख सकते हैं। इजरायल के पास आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम होने के बावजूद ये हथियार घातक साबित हुए हैं।
इसमें जो बड़ा बम पहले दागा जाता है उसे “पैरेंट म्यूनिशन” कहा जाता है। उसे जब दागा जाता है तो वह 7-10 किलोमीटर की ऊंचाई पर जाकर छोटे-छोटे बम (सबम्यूनिशन) छोड़ता है। ये छोटे बम बड़े इलाके में फैल जाते हैं- कुछ सौ मीटर से लेकर कई किलोमीटर तक। इससे सटीक निशाना कम हो जाता है, लेकिन असर का इलाका बड़ा हो जाता है।