राकेश भारती, ग्वालियर। शहर में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) चार्जिंग स्टेशन को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। शहर का पहला ईवी चार्जिंग स्टेशन बिना टीएंडसीपी और नगर निगम की औपचारिक अनुमति के बना दिया गया। इतना ही नहीं, शहर में बन रहे चार अन्य चार्जिंग स्टेशन भी बिना अनुमति के निर्माणाधीन बताए जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जिस चार्जिंग स्टेशन के निर्माण को लेकर अनुमति ही नहीं ली गई, उसका उद्घाटन तीन दिन पहले नगर निगम के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी में कर दिया गया।

जानकारी के अनुसार 15वें वित्त आयोग से नगर निगम को करीब 2 करोड़ रुपये की राशि मिली थी। इसी फंड से इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन बनाने के लिए टेंडर जारी किया गया था। टेंडर प्रक्रिया के बाद 1.52 करोड़ रुपये की लागत से फर्म “लैटिस” को शहर में पांच जगह ईवी चार्जिंग स्टेशन बनाने का काम दिया गया। इसी के तहत नगर निगम मुख्यालय के पास तरण पुष्कर के पीछे 12 मार्च को पहला चार्जिंग स्टेशन तैयार हुआ था। इस स्टेशन का उद्घाटन महापौर डॉ. शोभा सिकरवार, नगर निगम आयुक्त संघप्रिय, एमआईसी सदस्य अवधेश कौरव, विनोद यादव (माटू), अपर आयुक्त प्रदीप तोमर और सहायक यंत्री विद्युत अभिलाषा बघेल की मौजूदगी में किया गया था।
नगर निगम ने भले ही चार्जिंग स्टेशन की शुरुआत कर दी हो, लेकिन व्यवस्थाएं पूरी तरह अधूरी हैं। रात के समय चार्जिंग स्टेशन पर ताला लगा मिलता है और वहां किसी भी तरह की सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। स्टेशन पर कोई गार्ड या चौकीदार भी तैनात नहीं किया गया है, जिसके कारण रात में ईवी चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाती।
शहर में अन्य स्थानों पर भी चार्जिंग स्टेशन का निर्माण जारी है।
ग्वालियर में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार शहर में
इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए चार्जिंग स्टेशनों की जरूरत तो है, लेकिन नियमों की अनदेखी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
टीएंडसीपी के संयुक्त संचालक राजीव गवली ने कहा कि ईवी चार्जिंग स्टेशन निर्माण के लिए प्रदेश सरकार ने 2025 में नियम लागू कर दिए थे। उनके मुताबिक उनके कार्यभार संभालने के बाद ऐसी कोई अनुमति जारी नहीं की गई है। वहीं नगर निगम आयुक्त संघप्रिय का कहना है कि इस मामले में संबंधित अधिकारियों से चर्चा की जाएगी और यदि बिना अनुमति निर्माण हुआ है तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष हरिपाल ने कहा कि उन्हें उद्घाटन कार्यक्रम में बुलाया गया था, लेकिन वह कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। बिना अनुमति निर्माण के मामले में अधिकारियों से जानकारी लेने के बाद ही वह कुछ कह पाएंगे।