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भारत में टाइफाइड आज भी एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बना हुआ है। हर साल कई लोग इसके शिकार होते हैं, खासकर मानसून और उसके बाद के मौसम में। हाल ही में गुजरात के गांधीनगर में करीब 100 लोगों को टाइफाइड के कारण अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। यह साफ-साफ बताता है कि खराब पानी और सफाई की कमी वाले इलाकों में यह बीमारी कितनी तेजी से फैल सकती है।
टाइफाइड साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया से होती है। यह बैक्टीरिया दूषित पानी और खाना के जरिए शरीर में प्रवेश करता है। समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा भी हो सकती है।
टाइफाइड फीवर को मेडिकल भाषा में एंटरिक फीवर कहते हैं। यह बीमारी आंतों और खून को प्रभावित करती है। इसके आम लक्षण हैं-
भारत में हर साल लगभग 47 से 48 लाख मामले सामने आते हैं, जिनमें कुछ की मौत भी हो जाती है। यह बीमारी बच्चों और युवाओं में ज्यादा देखने को मिलती है, लेकिन साफ पानी और स्वच्छता की कमी वाले किसी भी व्यक्ति को हो सकती है।
भारत में टाइफाइड फैलने की मुख्य वजह-
इसके अलावा, असाफ खाना जैसे स्ट्रीट फूड, कच्ची सब्जियां, लस्सी और गन्ने का रस भी संक्रमण फैलाने का बड़ा कारण हैं। कुछ लोग ठीक होने के बाद भी बैक्टीरिया अपने शरीर में रखते हैं और दूसरों को अनजाने में संक्रमित कर सकते हैं।
लक्षण आमतौर पर इंफेक्शन के 1 से 3 हफ्ते बाद दिखने लगते हैं। शुरुआती लक्षण फ्लू जैसे होते हैं, लेकिन धीरे-धीरे बढ़ते हैं-
बीमारी गंभीर होने पर-
अगर किसी को 3-4 दिन से ज्यादा तेज बुखार और पेट दर्द है, तो जरूर टाइफाइड की जांच करानी चाहिए।