ट्रंप सरकार H1B वीजा फीस में कर रही सख्ती!ग्रीन कार्ड में भी बदलाव संभव, भारतीय छात्रों की बढ़ेगी मुसीबत

प्रशासन H-1B वीजा से जुड़े कई नियमों को सख्त करने की तैयारी में है। मौजूदा व्यवस्था में कुछ विश्वविद्यालयों और मान्यता प्राप्त शोध संस्थानों को सालाना H-1B वीजा लिमिट (कैप) से छूट मिलती है।
ग्रीन कार्ड में भी बदलाव संभव, भारतीय छात्रों की बढ़ेगी मुसीबत
ट्रंप सरकार H1B वीजा से जुड़े कई नियमों को सख्त करने की तैयारी में है

वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका का ट्रम्प प्रशासन इमिग्रेशन नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। अगर ये प्रस्ताव लागू होते हैं तो H-1B वीजा, रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड और छात्र वीजा हासिल करना पहले से ज्यादा कठिन हो सकता है। नए नियमों का सबसे अधिक असर भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स, छात्रों और उन अमेरिकी कंपनियों पर पड़ सकता है, जो विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देती हैं।

कब तक आएगा प्रस्ताव

ये प्रस्ताव अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS), श्रम विभाग (DOL) और विदेश विभाग (DOS) के संयुक्त रेगुलेटरी एजेंडा में शामिल हैं। अगस्त में इन बदलावों का प्रस्ताव जारी किया जा सकता है। हालांकि इन्हें लागू करने से पहले कानूनी प्रक्रिया और सार्वजनिक सुझावों का दौर पूरा होगा।

H-1B वीजा नियमों में क्या बदलाव हो सकते हैं?

प्रशासन H-1B वीजा से जुड़े कई नियमों को सख्त करने की तैयारी में है। मौजूदा व्यवस्था में कुछ विश्वविद्यालयों और मान्यता प्राप्त शोध संस्थानों को सालाना H-1B वीजा लिमिट (कैप) से छूट मिलती है। नए प्रस्ताव में इस छूट के लिए पात्रता के नियम कड़े किए जा सकते हैं। इसके अलावा, उन कंपनियों पर अतिरिक्त निगरानी रखी जा सकती है जो H-1B कर्मचारियों को थर्ड-पार्टी क्लाइंट साइट पर काम करने भेजती हैं। जिन कंपनियों का पहले वीजा नियमों के उल्लंघन का रिकॉर्ड रहा है, उनकी भी ज्यादा गहन जांच हो सकती है।

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EAD ऑटो एक्सटेंशन खत्म करने की तैयारी

ट्रम्प प्रशासन एम्प्लॉयमेंट ऑथराइजेशन डॉक्यूमेंट (EAD) के ऑटोमैटिक एक्सटेंशन को भी खत्म करने की योजना बना रहा है। अभी कई विदेशी कर्मचारियों को वर्क परमिट के नवीनीकरण के दौरान स्वतः राहत मिल जाती है, लेकिन नया नियम लागू होने पर उन्हें समय पर नया EAD मिलने तक काम करने में परेशानी हो सकती है। इस बदलाव का असर उन लोगों पर पड़ सकता है जो ग्रीन कार्ड या अन्य इमिग्रेशन प्रक्रियाओं के दौरान EAD पर काम कर रहे हैं।

भारतीयों पर क्यों पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?

H-1B वीजा का सबसे ज्यादा लाभ भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स उठाते हैं। हर साल बड़ी संख्या में भारतीय छात्र उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका जाते हैं और बाद में वहीं नौकरी के लिए H-1B वीजा या रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड का सहारा लेते हैं।

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अगर नए नियम लागू होते हैं, तो वीजा प्रक्रिया लंबी, महंगी और अधिक सख्त हो सकती है। इससे कंपनियों के लिए विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। फिलहाल ये सभी बदलाव प्रस्तावित हैं। इन्हें लागू करने से पहले सरकार को औपचारिक नियम बनाने होंगे, जिसके बाद ही यह तय होगा कि नए इमिग्रेशन नियम कब और किस रूप में लागू किए जाएंगे।

Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...

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