Aniruddh Singh
15 Jan 2026
नई दिल्ली। दिसंबर माह में देश का व्यापार घाटा बढ़कर 25.04 अरब डॉलर हो गया, जो नवंबर में दर्ज किए गए 5 माह के निचले स्तर 24.53 अरब डॉलर से थोड़ा अधिक है। दिसंबर में भारत ने जितना माल विदेशों को भेजा, उसकी तुलना में कहीं अधिक मूल्य का सामान विदेशों से आयात किया। हालांकि, यह बढ़ोतरी बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन यह संकेत मिलता है कि आयात में तेज उछाल ने व्यापार संतुलन पर दबाव डाला है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर में भारत का निर्यात सालाना आधार पर 1.86 प्रतिशत बढ़कर 38.51 अरब डॉलर रहा।
यह दिखाता है कि वैश्विक अनिश्चितताओं, सुस्त मांग और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारतीय निर्यात पूरी तरह कमजोर नहीं पड़ा है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में भारत के कुल निर्यात 850 अरब डॉलर को पार करने की उम्मीद है, जो अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है। अप्रैल से दिसंबर के नौ महीनों में कुल निर्यात 634.26 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से अधिक है। हालांकि निर्यात में यह बढ़ोतरी अपेक्षाकृत सीमित रही, वहीं आयात में कहीं तेज वृद्धि देखने को मिली।
दिसंबर में आयात बढ़कर 63.55 अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले 58.43 अरब डॉलर था। आयात में इस तेज उछाल का प्रमुख कारण घरेलू मांग में मजबूती, कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक इनपुट्स की जरूरत तथा कुछ वस्तुओं की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव माना जा रहा है। आयात अधिक बढ़ने से व्यापार घाटा बढ़ गया। सेवाओं के व्यापार के मोर्चे पर तस्वीर अपेक्षाकृत बेहतर रही। दिसंबर में सेवाओं का निर्यात 35.50 अरब डॉलर और आयात 17.38 अरब डॉलर रहा, जिससे करीब 18.12 अरब डॉलर का सेवाओं का अधिशेष बना। इसका मतलब यह है कि आईटी, सॉफ्टवेयर, बिजनेस सर्विसेज और अन्य पेशेवर सेवाओं से भारत को अब भी मजबूत विदेशी आय हो रही है, जो वस्तुओं के व्यापार घाटे के असर को काफी हद तक संतुलित करती है।
व्यापारिक साझेदारों की बात करें तो अप्रैल से दिसंबर की अवधि में अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात और चीन भारत के शीर्ष निर्यात गंतव्य रहे। खास बात यह है कि चीन को निर्यात में सालाना आधार पर 36.68 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि अमेरिका को निर्यात करीब 9.75 प्रतिशत बढ़ा। यह दिखाता है कि भारत अपने निर्यात बाजारों में विविधता लाने की रणनीति पर काम कर रहा है, ताकि किसी एक देश या क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता न रहे। कुल मिलाकर, दिसंबर के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था में घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है, जिसके कारण आयात बढ़ रहा है। वहीं निर्यात भी सकारात्मक दायरे में है, लेकिन उसकी रफ्तार अभी आयात के मुकाबले धीमी है। आने वाले महीनों में यदि वैश्विक मांग में सुधार होता है और नए व्यापार समझौते प्रभावी होते हैं, तो व्यापार घाटे पर दबाव कुछ कम हो सकता है।