जबलपुर। छिंदवाड़ा जिले के बहुचर्चित कफ सिरप मामले में 26 मासूमों की हुई मौत के मामले में परासिया थाना पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए 6 आरोपियों की जमानत अर्जियां मप्र हाईकोर्ट ने मंगलवार को खारिज कर दी हैं। जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच ने कहा है कि आरोपियों पर लगे आरोप काफी संगीन हैं, लिहाजा उन्हें जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।
गौरतलब है कि छिंदवाड़ा जिले के परासिया के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण सोनी द्वारा लिखे गए कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत हुई थी। मामले का खुलासा होने पर परासिया पुलिस ने जांच में पाया कि डॉ. प्रवीण सोनी द्वारा लिखे जाने वाला कोल्ड्रिफ कफ सिरप उसकी पत्नी ज्योति सोनी के मेडिकल स्टोर से बिकता था। पुलिस ने डॉ. सोनी, उसकी पत्नी ज्योति, उसके भतीजे राजेश और दवा दुकान में काम करने वाले फार्मासिस्ट सौरभ कुमार जैन को गिरफ्तार किया था। मामले में जमानत का लाभ पाने चारों आरोपियों की ओर से ये अर्जियां हाईकोर्ट में दाखिल की गई थीं।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह, शासकीय अधिवक्ता सीएम तिवारी और पैनल अधिवक्ता आकाश मालपाणी ने जमानत अर्जियों का कड़ा विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि कमीशन के लालच में आरोपियों ने सांठगांठ करके जहरीला कोल्ड्रिफ कफ सिरप बेचा था, जिससे 26 मासूमों की मौत हुई थी। इन जमानत अर्जियों पर हाईकोर्ट ने बीते 2 फरवरी को सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था, जो सोमवार को सुनाया गया।
इसी तरह छिंदवाड़ा के राम मंदिर के पास स्थित आशीर्वाद मेडिकल स्टोर के संचालक अनिल कुमार मिश्रा और फार्मासिस्ट अशोक कुमार मिश्रा की जमानत अर्जियां भी जस्टिस अग्रवाल की अदालत ने खारिज कर दी हैं। इन दोनों आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के बिना ही कोल्ड्रिफ सिरप बेची, जिसको पीने से एक चार साल की बच्ची की मौत हुई थी। कुंडीपुरा थाना पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया था। शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता सीएम तिवारी की दलील थी कि केन्द्र सरकार की स्पष्ट गाइडलाइन के बाद भी आरोपियों ने बिना परचे के दवा बेची, जो कानूनन जुर्म है।