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छिंदवाड़ा जहरीला कफ सिरप घटना ;आरोपियों को झटका, HC ने खारिज की डॉ. सोनी सहित अन्य की जमानत

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने आरोपियों की जमानत याचिकाओं का कड़ा विरोध किया। सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह और शासकीय अधिवक्ता सीएम तिवारी ने अदालत के सामने सख्त दलीलें पेश कीं।
आरोपियों को झटका, HC ने खारिज की डॉ. सोनी सहित अन्य की जमानत
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    जबलपुर। मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में जहरीला कफ सिरप पीने से 30 बच्चों की मौत के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रूख अपनाया है। न्यायालय ने मुख्य आरोपी डॉक्टर प्रवीण सोनी समेत चारों आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। जहां अब इस फैसले के बाद सभी आरोपियों को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।

    हाईकोर्ट : डॉक्टर ने दिशा-निर्देशों के नियम नहीं माने

    मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने बच्चों की मौत को अत्यंत गंभीर मामला बताते हुए कहा कि ऐसे अपराध में जमानत नहीं दी जा सकती। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोपी डॉक्टर ने सरकारी दिशा-निर्देशों की अनदेखी की और 4 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रतिबंधित फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन दवा दी। इसी लापरवाही के कारण 30 मासूम बच्चों की जान चली गई, जिसे कोर्ट ने बेहद गंभीर और अस्वीकार्य करार दिया।

    सीनियर डॉक्टर की सलाह भी नजरअंदाज की गई

    सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि आरोपी डॉक्टर प्रवीण सोनी ने नागपुर के एक वरिष्ठ डॉक्टर की सलाह को भी नजरअंदाज किया था। इसके बावजूद उन्होंने बच्चों को कफ सिरप दिया, जो बाद में उनकी मौत का कारण बना।

    मामले में छिंदवाड़ा पुलिस ने 5 अक्टूबर 2025 को आरोपी डॉक्टर को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया था, जहां से निचली अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था। इसके बाद जमानत के लिए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई, लेकिन अब हाईकोर्ट ने उसे खारिज कर दिया है।

    सरकार ने जताया था विरोध

    सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने आरोपियों की जमानत याचिकाओं का कड़ा विरोध किया। सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह और शासकीय अधिवक्ता सीएम तिवारी ने अदालत के सामने सख्त दलीलें पेश कीं। सरकार ने कहा कि आरोपी डॉक्टर प्रवीण सोनी द्वारा लिखे गए कफ सिरप उसी मेडिकल स्टोर से बेचे जा रहे थे।

    जो उनकी पत्नी के नाम पर संचालित था। अभियोजन पक्ष के मुताबिक यह पूरा मामला आर्थिक लाभ के लालच में रचा गया एक षड्यंत्र है। जहरीले कफ सिरप के सेवन से 30 मासूम बच्चों की जान चली गई, इसलिए ऐसे गंभीर अपराध में आरोपियों को जमानत देना न्यायोचित नहीं होगा।

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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