TMC में बगावत का असर :ममता ने सायोनी घोष और माला रॉय से छीने पद, अब किसे सौंपी जिम्मेदारी?

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदर चल रहा सियासी संकट लगातार गहराता जा रहा है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद शुरू हुई अंदरूनी कलह अब खुले राजनीतिक विद्रोह में बदल चुकी है। इसी बीच पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने बड़ा संगठनात्मक कदम उठाते हुए सांसद सायोनी घोष और माला रॉय को उनके अहम पदों से हटा दिया है।
दिलचस्प बात यह है कि, दोनों नेताओं को कुछ ही दिन पहले संगठन में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। लेकिन बागी सांसदों की सूची में नाम सामने आने के बाद ममता बनर्जी ने तत्काल कार्रवाई कर दी।
क्या हुआ बड़ा बदलाव?
टीएमसी की कार्यसमिति की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।
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पद |
पहले कौन था |
अब किसे जिम्मेदारी मिली |
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TMC यूथ विंग अध्यक्ष |
सायोनी घोष |
अर्नब बनर्जी |
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महिला मोर्चा अध्यक्ष |
माला रॉय |
अलीफा अहमद |
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उत्तर कोलकाता संगठन अध्यक्ष |
सुदीप बंद्योपाध्याय |
कुणाल घोष |
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये फैसले 12 जून को हुई बैठक में ही ले लिए गए थे, लेकिन उनकी जानकारी बाद में सार्वजनिक हुई।
7 दिन में दो बार संगठन में बदलाव
टीएमसी में घटनाक्रम बेहद तेजी से बदला।
3 जून : 58 विधायकों ने अलग गुट बनाने का दावा किया। इसके बाद ममता बनर्जी ने पार्टी की कई समितियां भंग कर दीं।
5 जून : नई नियुक्तियां की गईं। सायोनी घोष को युवा विंग और माला रॉय को महिला मोर्चा की जिम्मेदारी दी गई।
8 जून : 20 लोकसभा सांसदों के बागी गुट की खबर सामने आई। इसमें सायोनी घोष और माला रॉय का नाम भी शामिल बताया गया।
12 जून : ममता बनर्जी ने बैठक बुलाकर दोनों नेताओं को पदों से हटा दिया।
ममता के लिए बड़ा झटका क्यों हैं सायोनी घोष?
सायोनी घोष को लंबे समय तक ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है। उनकी पहचान टीएमसी की आक्रामक और युवा चेहरों में होती थी।
सायोनी घोष का राजनीतिक सफर
- बंगाली फिल्म इंडस्ट्री की चर्चित अभिनेत्री और गायिका रहीं।
- 2021 में टीएमसी में शामिल हुईं।
- आसनसोल से चुनाव लड़ा लेकिन हार गईं।
- 2024 में जादवपुर लोकसभा सीट से जीतकर संसद पहुंचीं।
- 2023 में टीएमसी यूथ विंग की अध्यक्ष बनीं।
सायोनी अक्सर भाजपा के खिलाफ अपने तीखे बयानों को लेकर सुर्खियों में रही हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान उनके काबा-मदीना लोकगीत को लेकर भी बड़ा राजनीतिक विवाद हुआ था।
बागी सांसदों की सूची में सायोनी और माला का नाम
टीएमसी में बगावत का सबसे बड़ा झटका तब लगा जब 20 लोकसभा सांसदों के अलग गुट बनाने की खबर सामने आई। इन सांसदों ने कथित तौर पर लोकसभा स्पीकर को पत्र भेजकर अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की है।
प्रमुख बागी सांसद
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सांसद |
लोकसभा सीट |
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सायोनी घोष |
जादवपुर |
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माला रॉय |
कोलकाता दक्षिण |
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यूसुफ पठान |
बहरामपुर |
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काकोली घोष दस्तीदार |
बारासात |
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शताब्दी रॉय |
बीरभूम |
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दीपक अधिकारी (देव) |
घाटाल |
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जगदीश बसुनिया |
कूचबिहार |
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रचना बनर्जी |
हुगली |
कुल 20 सांसदों के समर्थन का दावा किया जा रहा है।
सोमवार को स्पीकर से मिल सकता है बागी गुट
बागी सांसदों के नेता माने जा रहे जगदीश बसुनिया ने कहा है कि, उनका समूह लोकसभा स्पीकर से मुलाकात करेगा और अलग संसदीय ब्लॉक की मांग रखेगा। उधर सायोनी घोष और माला रॉय कोलकाता से दिल्ली रवाना हो चुकी हैं, जिससे राजनीतिक अटकलें और तेज हो गई हैं।
विधानसभा में भी टूट चुकी है पार्टी
लोकसभा ही नहीं, विधानसभा में भी टीएमसी को बड़ा नुकसान हुआ है।
विधानसभा की स्थिति
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कुल विधायक |
बागी विधायक |
ममता गुट के पास |
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80 |
58 |
22 |
58 विधायकों ने अलग गुट बनाकर ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना है।
लोकसभा और राज्यसभा में क्या है स्थिति?
लोकसभा
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कुल सांसद |
बागी सांसद |
ममता गुट के पास |
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28 |
20 |
8 |
राज्यसभा
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कुल सांसद |
इस्तीफा |
बचे |
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13 |
4 |
9 |
चार दिनों में चार राज्यसभा सांसदों ने छोड़ी पार्टी
टीएमसी को राज्यसभा में भी लगातार झटके लगे हैं।
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नाम |
इस्तीफे की तारीख |
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सुखेंदु शेखर रॉय |
8 जून |
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सुष्मिता देव |
10 जून |
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प्रकाश चिक |
11 जून |
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कोयल मलिक |
11 जून |
कोयल मलिक को तो केवल दो महीने पहले ही राज्यसभा भेजा गया था।
क्या बागी गुट को मिल सकती है कानूनी मान्यता?
दल-बदल कानून की 10वीं अनुसूची के अनुसार यदि किसी पार्टी के कम से कम दो-तिहाई विधायक या सांसद अलग गुट बनाते हैं तो उन्हें मान्यता मिल सकती है।
TMC में स्थिति
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सदन |
कुल सदस्य |
बागी |
स्थिति |
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विधानसभा |
80 |
58 |
दो-तिहाई से ज्यादा |
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लोकसभा |
28 |
20 |
दो-तिहाई से ज्यादा |
ऐसे में बागी गुट कानूनी तौर पर अलग समूह की मान्यता मांग सकता है। हालांकि, अंतिम फैसला विधानसभा अध्यक्ष और लोकसभा स्पीकर के हाथ में होगा।
क्या दोहराएगा महाराष्ट्र जैसा इतिहास?
राजनीतिक जानकार टीएमसी संकट की तुलना 2022 के महाराष्ट्र राजनीतिक संकट से कर रहे हैं। तब शिवसेना के 55 में से 40 विधायक एकनाथ शिंदे के साथ चले गए थे। बाद में शिंदे गुट को असली शिवसेना का दर्जा और पार्टी का चुनाव चिन्ह भी मिल गया था। अब बंगाल में भी वैसी ही स्थिति बनती दिखाई दे रही है, जहां बड़ी संख्या में विधायक और सांसद नेतृत्व के खिलाफ खड़े हो गए हैं।
TMC में फूट की 5 बड़ी वजहें
1. विधानसभा चुनाव में हार
चुनावी हार के बाद नेतृत्व और रणनीति पर सवाल उठने लगे।
2. अभिषेक बनर्जी की भूमिका पर असंतोष
बागी नेता लगातार अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव पर सवाल उठा रहे हैं।
3. नेता प्रतिपक्ष को लेकर विवाद
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के चयन को लेकर टकराव बढ़ा।
4. कथित हस्ताक्षर विवाद
फर्जी हस्ताक्षर के आरोपों ने संगठनात्मक संकट को और गहरा किया।
5. लंबे समय से चल रही गुटबाजी
पार्टी के भीतर असंतोष लंबे समय से मौजूद था, जो चुनावी हार के बाद खुलकर सामने आ गया।











