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West Bengal Politics:टीएमसी में बढ़ी अंदरूनी कलह, काकोली घोष ने महुआ मोइत्रा के बयान पर किया पलटवार

पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी के भीतर मतभेद एक बार फिर खुलकर सामने आ गए हैं। वरिष्ठ नेताओं के बीच चल रही बयानबाजी ने पार्टी की आंतरिक स्थिति को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दिया है। ताजा विवाद महुआ मोइत्रा और काकोली घोष दस्तीदार के बयानों के बाद और गहरा गया है।
टीएमसी में बढ़ी अंदरूनी कलह, काकोली घोष ने महुआ मोइत्रा के बयान पर किया पलटवार

महुआ मोइत्रा द्वारा बागी नेताओं के राजनीतिक भविष्य पर सवाल उठाए जाने के बाद काकोली घोष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दावा किया कि जनता अब कुछ नेताओं की राजनीति और उनके बनाए गए नैरेटिव को स्वीकार नहीं कर रही है। दोनों नेताओं के बीच बढ़ती बयानबाजी ने पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों को फिर सुर्खियों में ला दिया है।

महुआ मोइत्रा के बयान से शुरू हुआ विवाद

विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब महुआ मोइत्रा ने बागी सांसदों के राजनीतिक भविष्य को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कुछ नेता केवल राजनीतिक परिस्थितियों के कारण प्रासंगिक बने हुए हैं और भविष्य में उनकी भूमिका सीमित हो सकती है। महुआ ने यह भी संकेत दिया कि ऐसे नेताओं के लिए आगे की राजनीतिक राह आसान नहीं होगी। उनके इस बयान के बाद सियासी गालियारों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया।

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काकोली घोष ने एक्स पर पोस्ट कर साधा निशाना

महुआ मोइत्रा के बयान के जवाब में काकोली घोष दस्तीदार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कुछ दावे वास्तविकता से परे हैं और जनता उन्हें स्वीकार नहीं कर रही है। काकोली ने आरोप लगाया कि राजनीतिक माहौल को लेकर पेश की जा रही तस्वीर तथ्यात्मक नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जनता का रुख पहले ही कई मुद्दों पर स्पष्ट हो चुका है।

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जनता के जनादेश का दिया हवाला

काकोली घोष ने अपने बयान में जनादेश का जिक्र करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल के लोगों ने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं। उनके अनुसार जनता अब केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से प्रभावित नहीं होती, बल्कि काम और नीतियों के आधार पर निर्णय लेती है। उन्होंने दावा किया कि कुछ नेताओं की बयानबाजी लोगों के बीच प्रभाव नहीं छोड़ पा रही है। 

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पार्टी के भीतर मतभेदों पर बढ़ी चर्चा

लगातार सामने आ रहे बयानों ने टीएमसी के भीतर बढ़ते मतभेदों की अटकलों को और हवा दे दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेताओं के सार्वजनिक बयान पार्टी की आंतरिक असहमतियों को उजागर कर रहे हैं। हालांकि पार्टी की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। 

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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